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Thursday, June 20, 2024

विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा विश्व हिन्दी दिवस के शुभ अवसर पर वक्तागण आज एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन हिन्दी भवन के निराला सभागार लखनऊ में किया गया।

इस मौके पर डॉ0 कैलाश देवी सिंह, डॉ0 बलजीत श्रीवास्तव व डॉ0 अनुराधा पाण्डेय ‘अन्वी‘ को स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत डॉ0 अमिता दुबे, प्रधान सम्पादक, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा किया गया।

इस अवसर पर डॉ0 कैलाश देवी सिंह ने कहा कि हिन्दी को विश्व पटल पर पहुँचाने में फिल्मों, शैक्षिक संस्थानों, संचार माध्यमों ने काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। विश्व के अधिकांश देशों ने हिन्दी के महत्व को समझा है। अतीत में भी विदेशों में हिन्दी के क्षेत्र में काफी कार्य हुआ है। विदेशी विद्वानों ने हिन्दी भाषा के व्याकरण पर महत्वपूर्ण कार्य किया है। ई.मैगजीन के माध्यम से हिन्दी भाषा का विकास निरन्तर हो रहा है।

डॉ0 जार्ज ग्रियर्सन ने ‘भारत का भाषा सर्वेक्षण‘ पुस्तक लिखकर हिन्दी के लिए महती कार्य किया। विदेशी साहित्यकारों ने भारतीय साहित्य का अनुवाद के माध्यम से हिन्दी को समृद्ध किया है। फादर कामिल बुल्के ने ‘रामकथा‘ की रचना करके महान कार्य किया हैं। भारतीय लेखक, साहित्यकार आज विदेशों में हिन्दी को आगे बढ़ाने में निरन्तर प्रयासरत हैं। ये लेखक कथालेखन, आत्मकथा, संस्मरण, निबंधों आदि के माध्यम से हिन्दी को आगे बढ़ा रहे हैं।

डॉ0 बलजीत श्रीवास्तव ने कहा कि हिन्दी को विश्व मंच पर पहुँचाने का कार्य भारत ने कठिन प्रयास किये हैं। 160 से अधिक देशों में हिन्दी पढ़ी एवं पढ़ाई जा रही है। मारीशस को लघु भारत भी कहा जाता है। वहाँ हिन्दी भाषा का प्रयोग प्रचुर मात्रा में किया जाता है। सूरीनाम व मारीशस हिन्दी भाषा के माध्यम से भारतीय संस्कृति को समृद्ध कर रहे हैं। जार्ज ग्रियर्सन ने हिन्दी भाषा को समृद्ध करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। भारतीय लेखक, साहित्यकार विदेशों में हिन्दी भाषा के व्यापक प्रचार-प्रसार में संघर्षरत हैं। विदेशोें के विश्व विद्यालय-महाविद्यालयों में भी पठन-पाठन कार्य किये जा रहे हैं। फिजी में भी साहित्यिक संस्थाएं हिन्दी को आगे बढ़ाने में लगा हुआ है। विदेशों में स्थित शिक्षण केन्द्र हिन्दी को पुष्पित एवं निरन्तर पल्लवित कर रहे हैं। विश्व में रेडियों ने हिन्दी को काफी आगे बढ़ाया है। सूरीनाम, रूस जैसे देशों में आकाशवाणी केन्द्र हैं जिनसे हिन्दी में कार्यक्रम निरन्तर प्रसारित किये जाते हैं।

डॉ0 अनुराधा पाण्डेय ‘अन्वी‘ ने कहा कि आज गैर हिन्दी भाषी भी हिन्दी को आत्मसात कर रहे हैं। हिन्दी ‘हिन्दी की क्या बात करूँ मैं हिन्दी मुझसे बतियाती है‘। हिन्दी हमारे हृदय के काफी निकट है। हिन्दी में संप्रेषणीयता के गुण प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं हिन्दी का उद्भव देव भाषा संस्कृत से हुआ है। हिन्दी भाषा के व्याकरण संस्कृत भाषा से समृद्ध हुआ है। हिन्दी में ग्रहणशीलता के गुण है। हिन्दी भाषा लेखन एवं पाठन में सरलता है। हिन्दी एक सरल एवं लचीली भाषा है। हिन्दी का विकास संस्कृत से हुआ है। हिन्दी भाषा संपर्क भाषा के रूप में काफी प्रचलित है।

भारत एक बहुभाषी देश है। आजादी के बाद हिन्दी का विरोध धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है। आज वैश्विक समाज पर हिन्दी अपना स्थान बनाती जा रही है। विश्व में हिन्दी बोली जाने वाली तीसरी भाषा है। हिन्दी फिजी की आधिकारिक भाषा है। मारीशस में हिन्दी भाषा का व्यापक सृजन हो रहा है। मारीशस एवं सूरी नाम में अनेक पत्र-पत्रिकाएं भी प्रकाशित हो रहीं है। पूरे विश्व में हिन्दी साहित्य काफी लोक प्रिय हो रहा।

डॉ0 अमिता दुबे, प्रधान सम्पादक, उ0प्र0 हिन्दी संस्थान ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस संगोष्ठी में उपस्थित समस्त साहित्यकारों, विद्वत्तजनों एवं मीडिया कर्मियों का आभार व्यक्त किया।

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