गोहपारू पुलिस का फरमान: जब तक नहीं टूटेगी हड्डी तो नहीं होगी एफ.आई.आर.
शहडोल (मध्य प्रदेश)। गोहपारू थाना में पदस्थ एक पुलिस कर्मी पर कार्यवाही को लेकर पीड़ित पक्ष ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत की है। शिकायत में जातिवाद करने, फर्जी तरीके से एट्रोसिटी एक्ट लगाने की धमकी देने सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए है।
महिला शिकायतकर्ता ऊषा सिंह ने शिकायत में उल्लेख किया गया है कि कुछ लोगों ने उनकी मड़इया ध्वस्त कर उनकी जमीन पर कब्जा करने के साथ ही उनसे मारपीट की है लेकिन गोहपारू पुलिस के दो पुलिसकर्मी मुंशी ज्ञान सिंह ने मामले में कोई कार्यवाही नहीं की गई जबकि शरीर पर कई जगह लाठी डंडे के चोट के निशान लगे हैं।
शिकायतकर्ता ने बताया कि उक्त पुलिसकर्मी ने एम.एक.सी. करने के बाद यह कह कर घर भेज दिया कि मामला तहसील का है यदि हाथ पैर टूटा होता तो पुलिस एफआईआर दर्ज हो सकता था लेकिन इतने चोट पर एफआईआर नहीं होगी। शिकायतकर्ता ने बताया कि तहसील से स्थगन प्राप्त करने के बाद भी पुलिस की तरफ से स्थगन का पालन नहीं करवाया गया बल्कि जब स्थगन पालन को आवेदक ने कहा तो शिकायतकर्ता के दामाद जो कि कुशवाहा जाति का है उसको फर्जी एक्ट में फंसाने की धमकी दी गई है। पूरे मामले में महिला शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक से न्याय की मांग की है और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्यवाही करने की भी अपील की है।
जहां एक ओर आम आदमी पुलिस से न्याय की उम्मीद करता है वही दूसरी ओर कुछ वर्दीधारी पूरे पुलिस महकमे की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे है। चर्चा है कि न्याय प्रिय पुलिस कप्तान इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कोई बड़ी कार्यवाही कर सकते है। कानून के जानकारों का मानना है कि अगर ऐसा कोई पुलिस कर्मी करता है तो उस पर जांच होनी चाहिए और दोषी पुलिसकर्मी के लिए भी वही कानून है जो आम आदमी के लिए।
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