मुख्य सचिव ने की संभावित बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा
लखनऊ। प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी.गोयल ने संभावित बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा कर सभी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये।
अपने संबोधन में मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के संभावित बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के सभी जिलाधिकारी संबंधित विभागों एवं केन्द्रीय एजेन्सियों के साथ समन्वय बनाकर पूरी सतर्कता के साथ राहत एवं बचाव कार्यों को करायें तथा बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों एवं व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण भी करें, जिससे कहीं पर भी जन-धन का नुकसान न होने पाये।
उन्होंने कहा कि अति संवेदनशील और संवेदनशील क्षेत्रों में बाढ़ की आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त राहत सामग्री की उपलब्धता रहे। बाढ़ राहत शिविरों में लोगों के लिए लंच पैकेट, शुद्ध पेयजल, दवाओं व नाश्ते के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध रहे। अन्य राहत सामग्री की गुणवत्ता से भी कोई समझौता न किया जाए। इन स्थलों पर पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था एवं आवश्यक उपकरणों का भी प्रबन्ध होना चाहिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि बाढ़ के दौरान जिन गांवों में जलभराव की स्थिति बनेगी, वहां पशुओं की सुरक्षा के भी प्रबंध होने चाहिए। गोआश्रय स्थलों में पशु चारे की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। राज्य स्तर और जिला स्तर पर बाढ़ राहत कंट्रोल रूम 24×7 एक्टिव रहे। बाढ़/अतिवृष्टि की स्थिति में व्यवस्थाओं की नियमित मॉनीटरिंग की जाए। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ/पीएसी फ्लड यूनिट तथा आपदा प्रबंधन टीमें 24×7 एक्टिव मोड में रहें।
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि बाढ़/अतिवृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों में देरी न हो। प्रभावित परिवारों को जरूरी मदद तत्काल उपलब्ध कराई जाए। पर्याप्त नौकाएं, राहत सामग्री आदि के प्रबंध समय से हो जाए। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में बीमारियों के प्रसार की भी संभावना रहती है। ऐसे में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम भी सक्रिय रहे। लोगों के लिए अस्पतालों में क्लोरीन टैबलेट, ओआरएस, जरूरी दवायें आदि की उपलब्धता होनी चाहिए।
राहत आयुक्त ने बताया कि प्रदेश के 24 जनपद अतिसंवेदनशील स्थिति में हैं। इसमें महाराजगंज, कुशीनगर, लखीमपुर खीरी, गोरखपुर, बस्ती, बहराइच, बिजनौर, सिद्धार्थनगर, गाजीपुर, गोण्डा, बलिया, देवरिया, सीतापुर, बलरामपुर, अयोध्या, मऊ, फर्रुखाबाद, श्रावस्ती, बदायूं, अम्बेडकर नगर, आजमगढ़, संतकबीर नगर, पीलीभीत और बाराबंकी शामिल हैं। जबकि सहारनपुर, शामली, अलीगढ़, बरेली, हमीरपुर, गौतमबुद्ध नगर, रामपुर, प्रयागराज, बुलन्दशहर, मुरादाबाद, हरदोई, वाराणसी, उन्नाव, लखनऊ, शाहजहांपुर और कासगंज संवेदनशील प्रकृति के हैं।
बैठक में प्रमुख सचिव सिंचाई अनिल गर्ग, प्रमुख सचिव राजस्व पी. गुरुप्रसाद, राहत आयुक्त भानु चन्द्र गोस्वामी सहित सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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