सीएमओ ने बच्चों को टीका लगवाकर एमआर टीकाकरण अभियान का किया शुभारंभ
आजमगढ़, संवाददाता। जनपद में खसरा-रूबेला (एमआर) टीकाकरण अभियान का शुभारंभ मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एन. आर. वर्मा द्वारा श्री गया सिंह प्राथमिक विद्यालय पांडेयबाजार निकट शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र दलसिंगार से किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कक्षा-2 के प्रियांशु एवं कक्षा-1 की रिद्धि सहित कई बच्चों को खसरा-रूबेला टीका लगवाकर अभियान की औपचारिक शुरुआत की।
मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि एमआर टीकाकरण अभियान 16 फरवरी से 27 फरवरी 2026 तक जनपद में संचालित किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत जनपद के सभी सरकारी व निजी विद्यालयों, मदरसों तथा अन्य शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत कक्षा 1 से 5 (5 से 10 वर्ष आयु वर्ग) के बच्चों को खसरा-रूबेला टीका लगाया जा रहा है। इसके लिए विद्यालयों एवं चिन्हित स्थलों पर विशेष टीकाकरण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि अधिकतम बच्चों को इसका लाभ मिल सके।
उन्होंने निजी विद्यालयों की अपेक्षाकृत कम सहभागिता पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि यह अभियान बच्चों के स्वास्थ्य व सुरक्षित भविष्य से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। उन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग एवं अल्पसंख्यक विभाग से अपेक्षा की कि निजी विद्यालयों को इस महाअभियान में सक्रिय रूप से शामिल कराने हेतु विशेष प्रयास किए जाएँ, ताकि कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे।
अभियान के दौरान सीएमओ ने बच्चों से संवाद कर यह सुनिश्चित किया कि उन्होंने टीकाकरण से पूर्व भोजन किया है या नहीं। उन्होंने प्रशिक्षित एएनएम से अपने समक्ष बच्चों का टीकाकरण कराते हुए अभिभावकों को टीके की सुरक्षा, उपयोगिता एवं महत्व की जानकारी दी।
इस मौके पर जिला प्रतिरक्षण अधिकारी/एडिशनल सीएमओ डॉ. अब्दुल अज़ीज़, एडिशनल सीएमओ डॉ. उमाशरण पांडेय, संबंधित विद्यालय की प्राचार्य, प्रभारी प्रचार-प्रसार मनीष तिवारी, यूनिसेफ-यूएनडीपी प्रतिनिधि गुफरान अहमद एवं पूनम शुक्ला, हरिलाल (सहायक शोध अधिकारी) तथा एनएचएम शहरी समन्वयक प्रशांत सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
वहीं नोडल अधिकारी डॉ. अब्दुल अज़ीज़ ने बताया कि मदरसों में अवकाश होने के कारण वहाँ पूर्व में ही विशेष सत्र आयोजित कर अधिकांश बच्चों का टीकाकरण कर उन्हें आच्छादित किया जा चुका है।
मुख्य चिकित्साधिकारी ने अभिभावकों, विद्यालय प्रबंधन एवं जनसामान्य से अपील की कि वे बच्चों को निर्धारित तिथि एवं सत्र स्थल पर अवश्य भेजें, ताकि उन्हें खसरा-रूबेला जैसी गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सके।
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