मण्डलायुक्त के हस्तक्षेप से टूटा बजट का ताला, बच्चों की हार्ट सर्जरी का रास्ता हुआ साफ
अलीगढ़। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के लिए बड़ी राहत की खबर है। कुछ समय से बजट के अभाव में रुकी पड़ी बच्चों की हार्ट सर्जरी अब जल्द शुरू होने जा रही है। मण्डलायुक्त संगीता सिंह के प्रभावी हस्तक्षेप से 87 लाख रुपये की धनराशि आवंटित कर दी गई है, जिससे बच्चों के जीवन को नया संबल मिलेगा।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज स्थित इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी सेंटर में आरबीएसके योजना के तहत गरीब एवं कमजोर वर्ग के बच्चों की निःशुल्क हार्ट सर्जरी की जाती है। कुछ समय से बजट न मिलने के कारण दिल में छेद, हार्ट सर्जरी और स्टेंट डालने जैसे महत्वपूर्ण ऑपरेशन ठप हो गए थे, जिससे सैकड़ों बच्चे प्रतीक्षा सूची में फंसे थे।
मामला संज्ञान में आते ही मण्डलायुक्त संगीता सिंह ने एनएचएम के मिशन निदेशक को पत्र लिखकर रैफरल सपोर्ट फॉर सेकेंडरी-टर्शियरी केयर मद के अंतर्गत तत्काल बजट जारी करने का अनुरोध किया। उनके प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया और 87 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत कर दी गई।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 नीरज त्यागी ने बताया कि बजट आवंटन के बाद जेएन मेडिकल कॉलेज में बच्चों की हृदय सर्जरी का कार्य दोबारा शुरू कर दिया गया है। प्राथमिकता के आधार पर पहले से चिह्नित बच्चों को बुलाया जा रहा है, ताकि किसी भी बच्चे की जान जोखिम में न पड़े।
आरबीएसके के नोडल अधिकारी ने बताया कि जेएन मेडिकल कॉलेज में अब तक 2500 से अधिक बच्चों की सफल हार्ट सर्जरी की जा चुकी है। यह केंद्र दिल में छेद, स्टेंटिंग और कटे होंठ व तालू के ऑपरेशन के लिए प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। आरबीएसके योजना के तहत प्रदेश में अलीगढ़ समेत नोएडा पीजीआई और लखनऊ केजीएमयू में तीन प्रमुख केंद्र स्थापित हैं, जहां एक से 18 वर्ष तक के बच्चों को 38 प्रकार की शारीरिक अपंगता एवं गंभीर बीमारियों के लिए निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाता है।
मण्डलायुक्त की इस संवेदनशील और त्वरित प्रयास से आम जनमानस का न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हुआ है, बल्कि सैकड़ों परिवारों के चेहरों पर उम्मीद की मुस्कान भी लौटी है।
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