क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकें हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगी - डॉ जी0के0 गोस्वामी
लखनऊ, संवाददाता। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्राप्त निर्देशों के क्रम में बुधवार को उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ़ फॉरेंसिक साइंस लखनऊ में “मीट माई मेन्टोर” कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें डॉ0 अजय सिंह मन्टोर के रूप में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे।
उल्लेखनीय है कि डॉ0 अजय सिंह वर्तमान में राष्ट्रीय क्वान्टम मिशन भारत सरकार नई दिल्ली के सदस्य हैं, जिन्हें संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ0 जी0के0 गोस्वामी ने स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। डॉ0 सिंह एक विश्वस्तरीय रणनीतिकार, शिक्षाविद, साइबर सुरक्षा, क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विशेषज्ञ तथा न्यूयॉर्क स्थित Pace University के अकादमिक एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य हैं।
इस अवसर पर संस्थापक निदेशक डॉ जी0के0 गोस्वामी ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि लोग अक्सर कहते हैं कि क्वांटम मैकेनिक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग बहुत जटिल विषय हैं इसलिए उद्देश्य यही है कि कुछ भी जटिल नहीं है। यह इस पर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे समझते और ग्रहण करते हैं। चर्चा का तरीका ही चीजों को जटिल या सरल बनाता है। जीवन मूलतः जटिल से सरल की ओर बढ़ना है। यह पूरा प्रयास आपको भविष्य के लिए तैयार करने का है।
उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला और प्रयास आपको भविष्य के लिए तैयार करने का एक माध्यम है क्योंकि आने वाले समय में क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकें हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाली हैं इसलिए हम आपको तैयार करना चाहते हैं। दूसरों से पहले, आप बहुत आगे हों। उन्होंने कहा कि आज की समझ ही हमें कल नेतृत्व करने में सक्षम बनाएगी। अपनी कानूनी, फोरेंसिक और तकनीकी जानकारी को एकीकृत करें। वैश्विक स्तर पर जो बड़े बदलाव हो रहे हैं, उन्हें देखते हुए हमारी चिंता भी उसी दिशा में है। हमारा उद्देश्य है कि हम आपको इस तरह तैयार करें कि जब दुनिया जागे, तब तक आप उनसे काफी आगे हों।
डॉ0 गोस्वामी ने कहा कि कानूनी ज्ञान, फॉरेंसिक समझ और तकनीकी ज्ञान को एक साथ जोड़कर एक समग्र रूप में विकसित करें। हम आपको एक वन-स्टॉप सेंटर प्रदान करेंगे, जहां हर सवाल का समाधान मिलेगा। अगर कोई जानना चाहता है कि क्वांटम फॉरेंसिक्स क्या है, तो इसका उत्तर भी यहाँ मिलेगा।
इस अवसर पर अतिथि डॉ0 अजय सिंह ने कहा कि इस संस्थान को देखकर मैं विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि यह संस्थान विश्व-स्तरीय बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और आज जिस विषय पर हम चर्चा करने जा रहे हैं, वह उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि क्वांटम कंप्यूटिंग को लेकर हमारे मन में कई तरह की धारणाएँ हैं। हम इसे अक्सर बहुत कठिन, जटिल और केवल विशेषज्ञों के लिए बना हुआ विषय मान लेते हैं। यही सोच इसे और भी मुश्किल बना देती है लेकिन मेरा आज का उद्देश्य है कि इसके मूल सिद्धांतों को समझना है। हम यहाँ क्वांटम वैज्ञानिक बनने के लिए नहीं बैठे हैं, बल्कि हम नवाचार करने वाले (innovators) बनने के लिए यहाँ हैं। हमें यह समझना है कि क्वांटम तकनीक का उपयोग समाज के व्यापक हित में कैसे किया जा सकता है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जिन पर यह संस्थान कार्य करता है।
उन्होंने “मेनफ्रेम से क्वांटम कंप्यूटिंग तक कंप्यूटिंग का विकास” पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज हम क्लाउड कंप्यूटिंग का उपयोग तो करते हैं लेकिन यह पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। यदि किसी डेटा सेंटर पर हमला होता है, तो उसका असर कई संगठनों पर पड़ सकता है। क्योंकि ज्यादातर क्लाउड सिस्टम मल्टी-टेनेंट होते हैं। उन्होंने कहा कि अब आवाज, चेहरा और वीडियो को बहुत असली तरीके से क्लोन किया जा सकता है। थोड़े से सैंपल से भी किसी की आवाज़ की नकल बन सकती है, और उसका दुरुपयोग किया जा सकता है लेकिन इस नए खतरे से निपटने में फोरेंसिक इंस्टीट्यूट कारगर होगीद्य अब खतरा सिर्फ ईमेल या एसएमएस तक सीमित नहीं है। यह वॉइसमेल, वीडियो कॉल या किसी बॉस/सीनियर की नकली आवाज के जरिए भी आ सकता है, जो बिल्कुल वास्तविक लगेगी। सोशल मीडिया पर मशहूर लोगों की फोटो और आवाज का इस्तेमाल कर नकली निवेश स्कैम चलाए जा रहे हैं। इससे पहचान की चोरी बड़े स्तर पर हो रही है, और यही आज के समय का बड़ा जोखिम बन गया है।
डॉ0 सिंह ने बताया कि अगला खतरा ऐसे मालवेयर का है जो अपने-आप काम कर सकता है, सीख सकता है और खुद को विकसित भी कर सकता है। यह डिटेक्शन से बचने की क्षमता रख सकता है, जिससे साइबर अपराध और मुश्किल हो जाता है। इस अवसर पर डॉ सिंह ने बच्चो के सवालों का जबाब भी दिया।
इस अवसर पर उप महानिरीक्षक हेमराज मीना में संस्थान की तरफ से सभी अक वर्कशाप में भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उप निदेशक जितेन्द्र श्रीवास्तव, चिरंजीव मुखर्जी, अतुल यादव, पीआरओ संतोष तिवारी, फेकल्टी डॉ0 सपना शर्मा, डॉ0 श्रुतिदास गुप्ता, डॉ0 प्रीती, डॉ0 कमलेश दुबे, डॉ0 नेहा, डॉ0 पोरवी सिंह, डॉ0 स्नेहा, डॉ0 स्नेहिल सहित अन्य उपस्थित रहे।
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