ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व रखने वाली टेढ़ी नदी के पुनरूद्धार कार्यक्रम का हुआ श्रीगणेश
बहराइच। उदगम स्थल चित्तौरा झील से निकलकर जनपद में 61.400 कि.मी. तथा कुल 232 किलोमीटर के टेढ़े मेढ़े रास्ते तय कर अयोध्या जी स्थित सरयू नदी में विलीन होने वाली ‘टेढ़ी नदी’ (कुटिला नदी) अपना ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व रखती है। जिलाधिकारी मोनिका रानी के निर्देश पर विकास खण्ड हुज़ूरपुर स्थित ग्राम गौड़रिया में मुख्य विकास अधिकारी मुकेश चन्द्र ने क्षेत्र पंचायत प्रमुख हुज़ूरपुर अजीत प्रताप सिंह, खण्ड विकास अधिकारी अनुभा श्रीवास्तव, नायब तहसीलदार सुरेन्द्र यादव, ग्राम प्रधान जय प्रकाश चौरसिया सहित क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, गणमान्य व संभ्रान्तजन तथा ग्रामवासियों के साथ श्रमदान कर नदी के पुनरूद्धार कार्यक्रम का श्रीगणेश किया गया।
नदियों के महत्व की बात की जाय तो नदियों के बगैर मानव जाति के अस्तित्व की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। मानवजीवन के लिए नदियों के महत्व को इसी बात से समझा जा सकता है कि यह मात्र जल का एक महत्वपूर्ण साधन ही नहीं है बल्कि कृषि, उद्योग, परिवहन, ऊर्जा उत्पादन और सांस्कृतिक परंपराओं का भी आधार हैं। नदियाँ, मानव सभ्यता की रीढ़ हैं। नदियां मानव जाति को ईश्वर की ओर से प्राप्त होने वाला सबसे बड़ा उपहार है। जल स्रोत के तौर पर नदियां जहां हमें पीने योग्य पानी देती हैं वहीं अपने जलस्रोतों से खेतों में उगने वाली फसलों तथा विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों की ज़रूरतों को पूरा कर हमारे लिए भोजन व अन्य उपयोगी संसाधनों की पूर्ति करती हैं।
इसके अलावा नदियां जहां परिवहन का एक सस्ता और कुशल साधन हैं वहीं जलविद्युत उर्जा को सहारा देकर यही नदियां हमारे लिए विद्युत का भी प्रबन्ध करती हैं। नदियों के सांस्कृतिक महत्व की बात की जाय तो सभी धर्मों में नदियों को पवित्र एवं जीवनदायनी माना जाता है। विश्व की अनेकों महान सभ्यताएं नदियों के किनारे ही परवान चढ़ी हैं। नदियां विश्व में जैव विविधता को बनाएं रखने में मदद कर जलवायु संतुलन को बनाये रखने में सहायक तो हैं ही साथ ही पर्यटन के अवसर पैदा कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देकर जीवनदायनी के साथ जीवकोपार्जन का किरदार भी निभाती हैं। नदियों को स्वच्छ और संरक्षित रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। जल प्रदूषण और नदी प्रदूषण को रोकना आवश्यक है ताकि आने वाली पीढ़ियां भी नदियों का लाभ उठा सकें।
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