मुख्य सचिव के समक्ष राज्य स्तर पर एकीकृत ट्रॉमा एवं इमरजेंसी नेटवर्क की स्थापना के संबंध में एक किया गया विस्तृत प्रस्तुतीकरण

Jun 25, 2026 - 21:50
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मुख्य सचिव के समक्ष राज्य स्तर पर एकीकृत ट्रॉमा एवं इमरजेंसी नेटवर्क की स्थापना के संबंध में एक किया गया विस्तृत प्रस्तुतीकरण

लखनऊ, संवाददाता। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उत्तर प्रदेश में ट्रॉमा एवं आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ एवं अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राज्य स्तर पर एकीकृत ट्रॉमा एवं इमरजेंसी नेटवर्क (यूपीटीईएन) की स्थापना के संबंध में एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। 

प्रस्तुतीकरण के उपरांत मुख्य सचिव ने एकीकृत ट्रॉमा एवं इमरजेंसी नेटवर्क की स्थापना के प्रस्ताव पर अपनी सहमति व्यक्त करते हुए आवश्यक अनुमोदन प्राप्त होने के पश्चात आगे की कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, अमित कुमार घोष ने बताया कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं, गंभीर जलन, हृदयाघात, स्ट्रोक, सेप्सिस, विषाक्तता तथा प्रसूति एवं बाल चिकित्सा संबंधी आपात स्थितियों के प्रभावी प्रबंधन के लिए वर्तमान में एक समन्वित एवं एकीकृत प्रणाली का अभाव है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ट्रॉमा एवं आपातकालीन सेवाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु गठित टेक्निकल टास्क फोर्स कमेटी ने राज्यव्यापी एकीकृत ट्रॉमा एवं आपातकालीन प्रणाली की स्थापना की संस्तुति की है।

समिति ने उत्तर प्रदेश ट्रॉमा एवं इमरजेंसी नेटवर्क (यूपीटीईएन) की स्थापना का सुझाव देते हुए कहा है कि यह पहल प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को आपात स्थिति में गोल्डन ऑवर के भीतर गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उन्होंने बताया कि यूपीटीईएन को एक एकीकृत, त्रिस्तरीय, बहु-चरणीय एवं केंद्रीकृत नेतृत्व आधारित नेटवर्क के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अंतर्गत स्तर-1 में 11 शीर्ष एवं प्रमुख शिक्षण संस्थानों को शामिल किया जाएगा, जबकि स्तर-2 में 36 मेडिकल कॉलेजों को जोड़ा जाएगा। स्तर-3 पर प्राथमिक स्तर पर मरीजों के स्थिरीकरण (स्टेबलाइजेशन) हेतु 126 केंद्रों को चिन्हित किया गया है। इसके अतिरिक्त प्रारंभिक चरण में 137 निजी चिकित्सा संस्थानों को भी नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

इस प्रकार यूपीटीईएन के प्रथम चरण में कुल 310 चिकित्सा इकाइयों एवं केंद्रों को शामिल किया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार भविष्य में इस नेटवर्क का विस्तार भी किया जा सकेगा। परियोजना को व्यवहारिकता के आधार पर तीन चरणों में लागू किए जाने का प्रस्ताव है।

नेटवर्क के प्रभावी संचालन एवं सतत निगरानी के लिए राज्य स्तरीय डिजिटल डैशबोर्ड स्थापित किया जाएगा। इसके माध्यम से सभी आपातकालीन कमांड केंद्रों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। यह प्रणाली एम्बुलेंस सेवाओं के साथ समन्वय स्थापित करते हुए रियल-टाइम बेड उपलब्धता का प्रबंधन करेगी, मरीजों के अंतर-संस्थागत स्थानांतरण को सुगम बनाएगी तथा डेटा संकलन एवं शिकायत निवारण के लिए नोडल व्यवस्था के रूप में कार्य करेगी। यूपीटीईएन को राज्य की 108 एम्बुलेंस सेवा तथा 112 आपातकालीन सेवा के साथ भी एकीकृत किया जाएगा, जिससे आपातकालीन चिकित्सा प्रतिक्रिया प्रणाली को और अधिक तीव्र एवं प्रभावी बनाया जा सके।

प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत आपातकालीन उपचार के प्रथम 48 घंटों तक निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा नेटवर्क को टेलीमेडिसिन एवं डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ एकीकृत करने का भी प्रावधान किया गया है। इससे प्रदेश में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता, पहुंच और दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होने की अपेक्षा है।

बैठक में सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ0 पिंकी जोवेल, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ0 सारिका मोहन, विशेष सचिव चिकित्सा शिक्षा कृतिका शर्मा, गठित समिति के पदाधिकारीगण, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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