शीतलहर में डीएम का औचक निरीक्षण, व्यवस्थाओं की पोल खुली

Jan 7, 2026 - 21:39
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शीतलहर में डीएम का औचक निरीक्षण, व्यवस्थाओं की पोल खुली

हमीरपुर। भीषण शीतलहर के बीच मंगलवार देर रात जिलाधिकारी घनश्याम मीणा के औचक निरीक्षण ने प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच के फर्क को उजागर कर दिया। जैसे ही डीएम के भ्रमण की सूचना संबंधित विभागों को मिली, वैसे ही शहर में व्यवस्थाएं अचानक चुस्त-दुरुस्त नजर आने लगीं। अलावों में अतिरिक्त लकड़ी डाल दी गई, अस्पतालों में स्टाफ की मौजूदगी बढ़ा दी गई और रैन बसेरों में तात्कालिक सुधार दिखाई देने लगा।

मंगलवार को न्यूनतम तापमान गिरकर 6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस सर्दी का अब तक का सबसे ठंडा दिन रहा। ऐसे में डीएम ने रात करीब सवा नौ बजे शीतलहर से बचाव की व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए वृद्धाश्रम, रैन बसेरों और जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया।

निरीक्षण की शुरुआत नगर के वृद्धाश्रम से हुई। यहां डीएम ने वृद्धजनों से बातचीत कर भोजन, आवास और ठंड से बचाव की सुविधाओं की जानकारी ली। मौके पर कंबल वितरित किए गए और संचालकों को निर्देश दिए गए कि बुजुर्गों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। इस स्थान पर व्यवस्थाएं अपेक्षाकृत बेहतर नजर आईं।

इसके बाद डीएम नगर पालिका परिषद द्वारा संचालित रैन बसेरों में पहुंचे। यहां बिस्तर, कंबल और साफ-सफाई की जांच की गई। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि निरीक्षण की सूचना मिलते ही यहां अतिरिक्त कंबल और चादरें पहुंचाई गईं। कुछ देर पहले तक जो व्यवस्थाएं सामान्य थीं, वे अचानक बेहतर दिखाई देने लगीं।

डीएम के जिला अस्पताल पहुंचते ही स्वास्थ्य विभाग में अफरा-तफरी मच गई। उन्होंने इमरजेंसी, महिला वार्ड और बच्चों के वार्ड का निरीक्षण किया। मरीजों से बातचीत में दवाओं और सुविधाओं को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। डीएम ने कर्मचारियों की उपस्थिति पंजिका का अवलोकन कर लापरवाही पर नाराजगी जताई। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. केएस मिश्रा निरीक्षण की सूचना मिलने पर चप्पल पहनकर भागते हुए अस्पताल पहुंचीं। तब तक डीएम महिला वार्ड से निकलकर पुरुष अस्पताल के जनरल वार्ड में जा चुके थे। स्टाफ ने बताया कि सीएमएस उस समय अपने आवास पर थीं।

डीएम के निरीक्षण का सबसे बड़ा असर अलावों पर दिखाई दिया। नगर पालिका द्वारा अस्पताल और प्रमुख चौराहों पर जलाए जा रहे अलावों में आम दिनों की तुलना में कहीं अधिक लकड़ी डाली गई। एक तीमारदार ने बताया कि वह पिछले तीन दिनों से अस्पताल में है, लेकिन आज जैसी तेज आग पहले कभी नहीं देखी।

डीएम ने नगर पालिका और राजस्व विभाग को निर्देश दिए कि रात्रि में प्रमुख स्थानों, रैन बसेरों और अस्पतालों के आसपास अलाव की निरंतर व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही स्वच्छता, साफ चादरें, गर्माहट और पेयजल की उपलब्धता बनाए रखने को कहा।

हालांकि यह निरीक्षण यह भी सवाल छोड़ गया कि यदि डीएम के आने से पहले व्यवस्थाएं कमजोर थीं, तो क्या आम दिनों में गरीब, मरीज और बेसहारा लोग ठंड से जूझने के लिए यूं ही छोड़ दिए जाते हैं? निरीक्षण के दौरान दिखी सक्रियता यह संकेत देती है कि व्यवस्था स्थायी सुधार से ज्यादा दिखावे पर आधारित है।

निरीक्षण में एडीएम (वित्त एवं राजस्व) विजय शंकर तिवारी, तहसीलदार वीर पाल, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी हेमराज सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अब देखना होगा कि डीएम के निर्देश केवल कागजों तक सीमित रहते हैं या वास्तव में ठंड से राहत के लिए स्थायी इंतजाम किए जाते हैं।

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