मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग नीति के क्रियान्वयन पर विचार-विमर्श हेतु उच्चस्तरीय बैठक सम्पन्न

Jul 22, 2026 - 21:57
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मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग नीति के क्रियान्वयन पर विचार-विमर्श हेतु उच्चस्तरीय बैठक सम्पन्न

लखनऊ, संवाददाता। मुख्य सचिव एस.पी.गोयल की अध्यक्षता में उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग नीति के क्रियान्वयन पर विचार-विमर्श हेतु उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों को अपने उपविधियों में संशोधन कर उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग के प्रावधान शामिल करने तथा अपनी पुनः उपयोग योजनाएँ तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी एसटीपी एवं मांग केन्द्रों का जीआईएस आधारित मानचित्रण करने पर बल दिया।

मुख्य सचिव ने एनएमसीजी से राज्य के सभी 17 नगर निगमों के लिए शहर स्तर पुनः उपयोग कार्ययोजना तैयार करने का अनुरोध किया और राज्य विभागों को इस संबंध में औपचारिक अनुरोध भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से एसटीपी के डिस्चार्ज मानकों पर स्पष्टीकरण प्राप्त करने का सुझाव दिया।

बैठक में राज्य स्तर पर उच्चाधिकार प्राप्त समिति-बनउ-मूल्य निर्धारण समिति, तकनीकी समिति/सेल, जिला स्तर पर पुनः उपयोग समितियाँ तथा विवाद समाधान समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा गया। एनएमसीजी की सहायता से एसटीपी प्रशासकों एवं पुनः उपयोग भागीदारों के बीच सेवा स्तर समझौते तैयार करने का सुझाव भी दिया गया।

मुख्य सचिव ने जल शक्ति मंत्रालय से अनुरोध करने का सुझाव दिया कि वह अन्य मंत्रालयों जैसे रेलवे, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, कृषि, विमानन, ऊर्जा, आवास एवं शहरी कार्यको उपचारित जल को द्वितीयक उपयोग हेतु अपनाने के लिए निर्देशित करे।

बैठक में यह भी जोर दिया गया कि सभी उपयोगकर्ताओं को उपचारित जल की आपूर्ति गुणवत्ता एवं मात्रा दोनों दृष्टि से सुनिश्चित की जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि विश्वसनीय आपूर्ति से हितधारकों का विश्वास बढ़ेगा और पुनः उपयोग की व्यापक स्वीकृति को प्रोत्साहन मिलेगा।

यह निर्णय लिया गया कि नियमित निगरानी एवं रिपोर्टिंग तंत्र को सुदृढ़ किया जाएगा ताकि अपेक्षित परिणाम प्राप्त किए जा सकें। बैठक का समापन विभागों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल देते हुए किया गया।

इससे पहले बैठक में चल रहे परियोजनाओं एवं पहलों को सुदृढ़ बनाने पर चर्चा हुई ताकि राज्य में उपचारित जल का सुरक्षित पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। विभागीय समन्वय, समयबद्ध अनुपालन तथा प्रभावी निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया गया।

बैठक में पनकी ताप विद्युत केंद्र, मथुरा आईओसीएल रिफाइनरी तथा गाज़ियाबाद की औद्योगिक इकाइयों द्वारा किए गए सफल पुनः उपयोग के उदाहरण प्रस्तुत किए गए। नोएडा के महाप्रबंधक ने बताया कि नोएडा क्षेत्र में उपलब्ध 260 एमएलडी उपचारित जल में से 120 एमएलडी का पुनः उपयोग किया जा रहा है तथा 140 एमएलडी जल को नदी हिंडन में प्रवाहित कर उसकी पारिस्थितिकी को सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि दादरी ताप विद्युत केंद्र द्वारा 80 एमएलडी जल का उपयोग किया जा सकता है, जिससे नोएडा को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने मथुरा-वृंदावन के 13 एमएलडी एसटीपी से उपचारित जल के पुनः उपयोग हेतु अधोसंरचना विस्तार पर सहमति दी है, जिससे यमुना नदी के प्रवाह को बढ़ाने हेतु तटवर्ती जलाशयों का पुनर्भरण किया जा सके।

लखनऊ में प्रस्तावित पीएम मित्रा टेक्सटाइल पार्क हेतु 39 एमएलडी दौलतगंज एसटीपी से 22.5 एमएलडी उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग हेतु अधोसंरचना निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसी प्रकार वाराणसी में पीएम मित्रा टेक्सटाइल पार्क हेतु 50 एमएलडी रमना एसटीपी से 10 एमएलडी उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग की योजना है।

प्रयागराज जंक्शन पर रेलवे द्वारा 60 एमएलडी राजापुर एसटीपी से 2 एमएलडी तथा रेलगांव एवं सुबेदारगंज स्टेशनों पर 25 एमएलडी कोदरा एसटीपी से 2 एमएलडी गैर-पेयजल के पुनः उपयोग हेतु प्रस्ताव एनएमसीजी को भेजे गए हैं।

वाराणसी, आगरा एवं प्रयागराज के शहर स्तर पुनः उपयोग कार्ययोजना  प्रस्तुत की गई। एनएमसीजी ने बताया कि कानपुर नगर की कार्ययोजना भी तैयार की जा रही है। एनएमसीजी के उप महानिदेशक ने अवगत कराया कि गंगा पल्स पोर्टल के माध्यम से एसटीपी की निगरानी की जा रही है, जिसमें उपचारित जल की गुणवत्ता का डेटा प्रत्येक 10 मिनट पर उपलब्ध होता है। इससे वास्तविक समय में निगरानी संभव होगी और जल की गुणवत्ता के आधार पर आपूर्ति जारी रखने अथवा रोकने का निर्णय लिया जा सकेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार, उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रहा है और राज्यों को नीति के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु हर संभव सहयोग प्रदान करेगा।

बैठक में यह भी बताया गया कि अब एसटीपी की डीपीआर में पुनः उपयोग अधोसंरचना एवं संभावित उपयोगकर्ताओं को शामिल किया जा रहा है। ये डीपीआर एनएमसीजी को अनुमोदन एवं वित्तपोषण हेतु भेजी जा रही हैं।

बैठक में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन तथा राज्य के प्रमुख विभागों नगर विकास, सिंचाई, वन एवं जलवायु परिवर्तन, उद्योग, ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य, पंचायती राज, आवास एवं योजना, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल निगम (ग्रामीण एवं शहरी), वन विभाग, चिकित्सा स्वास्थ्य, जल कल, यूपीआरवीयूएनएल/यूपीपीटीसीएल, यूपीपीसीएल, नमामि गंगे तथा ग्रामीण जलापूर्ति, नियोजन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

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