चार किलोमीटर कच्ची सड़क से जूझ रहे दर्जनों गांवों के लोग
उतरौला (बलरामपुर), संवाददाता। उतरौला विकास खंड के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की बदहाल स्थिति ने विकास की रफ्तार पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। श्रृंगार जोत मार्ग से बभनी बुर्जुग डीह तक पक्की सड़क तो बनी हुई है लेकिन गौशाला, तिलखी होते हुए अर्जून देवरिया तक जाने वाला करीब चार किलोमीटर लंबा मार्ग आज भी कच्चा है। इस कारण दर्जनों गांवों के ग्रामीणों और किसानों को रोजाना भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग क्षेत्र के लगभग आधा दर्जन गांवों के लिए जीवनरेखा के समान है लेकिन कच्ची सड़क होने के कारण हल्की बारिश में ही यह पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाती है। किसान जगराम, सीता राम, कश्यप, गोपाल चौधरी, देवेंद्र कुमार मिश्रा और वेद व्रत मिश्रा ने बताया कि फसल की ढुलाई के दौरान ट्रैक्टर-ट्रॉली का पलटना आम बात हो गई है। कई बार गेहूं से लदी ट्रॉलियां पलटने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
तिलखी बढ़या ग्राम पंचायत के मजरा बढ़या की स्थिति तो और भी गंभीर है। ग्रामीणों के अनुसार आजादी के लगभग 80 वर्ष बीत जाने के बावजूद यहां सड़क जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं हो सकी है। राम सेवक, कन्हैया लाल, सोनू निषाद, राधे श्याम यादव और भगवत प्रसाद मिश्र ने बताया कि पिपरा राम-तिलखी मुख्य मार्ग से मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर होने के बावजूद इस गांव तक पक्की सड़क नहीं बन पाई है, जिससे आवागमन बेहद कठिन बना रहता है।
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले चुनाव के दौरान उन्होंने सड़क निर्माण की मांग को लेकर चुनाव बहिष्कार तक का ऐलान किया था। उस समय जनप्रतिनिधियों द्वारा आश्वासन तो दिया गया, लेकिन आज तक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इसी प्रकार डुमरियागंज रोड पर पुरैना बुलंद से प्राणपुर तक की सड़क भी पूरी तरह जर्जर होकर गड्ढों में तब्दील हो चुकी है।
राजेश मिश्रा, कामेश मिश्रा और राजू मिश्रा सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार विधायक और सांसद को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। खराब सड़कों के कारण न केवल किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि आम जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और रोजमर्रा के यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
यह स्थिति ग्रामीण बुनियादी ढांचे में असंतुलन को दर्शाती है, जहां योजनाओं की घोषणा तो होती है, लेकिन उनका धरातल पर क्रियान्वयन समय पर नहीं हो पाता। सड़क जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव न केवल आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करता है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास पर भी सीधा असर डालता है।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि समस्या की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र ही सड़कों का निर्माण एवं मरम्मत कार्य कराया जाए, ताकि क्षेत्र में सुचारु आवागमन सुनिश्चित हो सके और विकास की गति को वास्तविक रूप दिया जा सके।
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