किसान के बेटे ने बदली तकदीर, तराई क्षेत्र के अंकुर सिद्धार्थ बने नायब तहसीलदार

Mar 31, 2026 - 21:38
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किसान के बेटे ने बदली तकदीर, तराई क्षेत्र के अंकुर सिद्धार्थ बने नायब तहसीलदार

बलरामपुर, संवाददाता। जनपद बलरामपुर के तराई और ग्रामीण अंचल से एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र का गौरव बढ़ा दिया है। विकास खण्ड बलरामपुर के ग्राम पंचायत बलुई निवासी किसान परिवार के होनहार पुत्र अंकुर सिद्धार्थ, पिता अरविन्द कुमार, का चयन नायब तहसीलदार के प्रतिष्ठित पद पर हुआ है।

अंकुर की इस उपलब्धि की सूचना मिलते ही गांव सहित पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। स्थानीय शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने इसे क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया।

अंकुर सिद्धार्थ एक साधारण किसान परिवार से संबंध रखते हैं, जहां संसाधनों की कमी हमेशा एक चुनौती रही। इसके बावजूद उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया। सीमित संसाधनों के बीच रहकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत से कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है।

अंकुर की प्रारंभिक शिक्षा कक्षा 1 से 5 तक किसान आदर्श बाल विद्या मंदिर, रमईडीह से हुई। इसके बाद उन्होंने कक्षा 6 से 12 तक की शिक्षा नवोदय विद्यालय, बलरामपुर से प्राप्त की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से आईआईटी (बीटेक) की डिग्री हासिल की। शिक्षा के प्रत्येक चरण में उनका प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा और वे लगातार अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहे।

ग्रामीण परिवेश में पढ़ाई करते हुए अंकुर को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हर कठिनाई को अवसर में बदलते हुए अपने सपनों को साकार किया। उनकी सफलता वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और अटूट संकल्प का परिणाम है।

अंकुर सिद्धार्थ की उपलब्धि आज क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। विशेषकर ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं के लिए यह संदेश है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है।

अंकुर के चयन की खबर मिलते ही ग्राम बलुई सहित पूरे क्षेत्र में जश्न का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटकर खुशी का इजहार किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

ग्रामीणों का कहना है कि अंकुर ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा किसी शहर या संसाधनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि सही दिशा, लगन और परिश्रम से हर सपना साकार किया जा सकता है।

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