मुख्य सचिव ने की प्रदेश की वर्तमान भूजल स्थिति, जल संरक्षण एवं जल संवर्धन की भावी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा

Jul 8, 2026 - 21:54
 0  11
मुख्य सचिव ने की प्रदेश की वर्तमान भूजल स्थिति, जल संरक्षण एवं जल संवर्धन की भावी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा

लखनऊ, संवाददाता। प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने प्रदेश की वर्तमान भूजल स्थिति, जल संरक्षण एवं जल संवर्धन की भावी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की।  

मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को प्रभावी, समन्वित एवं परिणामोन्मुखी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में भूजल प्रबंधन के दीर्घकालिक उपायों को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाए।

उन्होंने कहा कि सिंचाई क्षेत्र में भूजल पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए पारंपरिक सिंचाई पद्धतियों में सुधार करते हुए कम जल खपत वाली फसलों को प्रोत्साहित किया जाए। इसके साथ ही सूक्ष्म सिंचाई, पॉलीहाउस, शेडनेट, भूमिगत पाइप सिंचाई तथा एकीकृत सिंचाई प्रणाली के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ सतही सिंचाई प्रणालियों का भी विस्तार किया जाए। 

उन्होंने शहरी क्षेत्रों में जल निकायों को अतिक्रमण से मुक्त कर उनका संरक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पार्कों में अनावश्यक पक्के निर्माण को सीमित करते हुए रिचार्ज संरचनाओं की व्यवस्था, वर्षा जल संचयन प्रणालियों का प्रभावी क्रियान्वयन तथा व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने पर विशेष बल दिया।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि अतिदोहित एवं क्रिटिकल विकास खंडों में सभी कार्यदायी विभाग अपने बजट का प्राथमिकता के आधार पर कनवर्जेन्स करते हुए भूजल रिचार्ज योजनाओं की कार्ययोजना तैयार करें। उन्होंने कहा कि वीबी-जी-राम-जी योजना में जल संरक्षण कार्यों हेतु उपलब्ध विशेष प्रावधानों का अधिकतम उपयोग किया जाए। साथ ही, शहरी क्षेत्रों में रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग एवं तालाब संरक्षण संबंधी शासनादेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए तथा कनवर्जेन्स के माध्यम से व्यापक जल रिचार्ज अवसंरचना विकसित की जाए।

बैठक में बताया गया कि ‘भूजल सप्ताह-2026’ का आयोजन 16 से 22 जुलाई, 2026 तक पूरे प्रदेश में किया जाएगा। इस वर्ष अभियान की थीम “जल संरक्षण का करें संकल्प, इसका नहीं है कोई विकल्प” निर्धारित की गई है।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी 75 जनपदों में व्यापक जन-जागरूकता अभियान संचालित किया जाए। पहली बार इस अभियान में राज्य की सभी ग्राम पंचायतों, विकास खंडों, नगर पंचायतों, नगर पालिका परिषदों, नगर निगमों एवं विकास प्राधिकरणों को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि यह अभियान सात दिवसीय समन्वित जनआंदोलन के रूप में संचालित किया जाए तथा ग्राम पंचायत, विकास खंड, नगर निकाय एवं जनपद स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने निर्देश दिए कि अभियान के दौरान रैलियां, दीवार लेखन, पोस्टर अभियान, निबंध प्रतियोगिताएं तथा अन्य जनजागरूकता गतिविधियों के माध्यम से विशेष रूप से विद्यालयी बच्चों एवं युवाओं को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि भूजल जागरूकता एवं जल साक्षरता एक सतत प्रक्रिया है। इसलिए सभी विभाग वर्षभर आयोजित होने वाले जनसहभागिता आधारित कार्यक्रमों में भूजल प्रबंधन विभाग की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें, ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग में जल संरक्षण के प्रति स्थायी जागरूकता विकसित की जा सके।

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में भूजल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। पिछले 10 वर्षों के औसत भूजल स्तर के आधार पर 361 विकास खंडों में भूजल स्तर में सुधार की प्रवृत्ति देखी गई है, जबकि 343 विकास खंड स्थिर श्रेणी में हैं, जहां सुधार अथवा गिरावट 10 सेंटीमीटर से कम है। इसके अतिरिक्त 172 विकास खंडों में प्रतिवर्ष 10 सेंटीमीटर से अधिक सुधार तथा 69 विकास खंडों में पिछले 10 वर्षों में 20 सेंटीमीटर से अधिक भूजल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है।

बैठक में यह भी बताया गया कि विभिन्न भूजल रिचार्ज परियोजनाओं के प्रभाव से प्रदेश में अतिदोहित विकास खंडों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2013 में जहां ऐसे विकास खंडों की संख्या 113 थी, वहीं वर्ष 2025 में यह घटकर 44 रह गई है। साथ ही, वर्ष 2017 की तुलना में वर्ष 2025 तक प्रदेश के कुल वार्षिक भूजल रिचार्ज में लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो राज्य सरकार द्वारा संचालित जल संरक्षण एवं रिचार्ज अभियानों की प्रभावशीलता का प्रमाण है।

बैठक में अपर मुख्य सचिव नमामि गंगे अनुराग श्रीवास्तव सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण आदि उपस्थित थे।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow