शिक्षा प्राप्त करने का उद्देश्य जीवन यापन करना नहीं बल्कि राष्ट्र के उत्थान एवं विकास हेतु कार्य करना है - राज्यपाल
सिद्धार्थनगर, संवाददाता। राज्यपाल/ कुलाधिपति आनन्दी बेन पटेल सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, में विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित दशम् दीक्षान्त समारोह में शामिल हुईं। कुलाधिपति/राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल, मुख्य अतिथि काशी हिन्दू विश्व विद्यालय, वनस्पति विज्ञान प्रो0 मधुलिका अग्रवाल, विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी तथा कुलपति प्रो0 कविता शाह द्वारा मां शारदा के चित्र पर माल्यार्पण कर दशम् दीक्षान्त समारोह का औपचारिक शुभारम्भ किया गया।
कुलपति सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु प्रो0 कविता शाह ने राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल, मुख्य अतिथि तथा विशिष्ट अतिथि को पुष्प देकर स्वागत किया। इस अवसर पर प्रकाशित उत्कर्ष स्मारिका एवं मासिक पत्रिका कनेक्ट का विमोचन किया गया।
कुलाधिपति आनन्दी बेन पटेल ने कहा कि मुझे गर्व की अनुभूति हो रही है। यह बुद्ध की पावन धरती है। मैं इस धरती को प्रणाम करती हूं। यहां पर गौतम बुद्ध ने विश्व को शान्ति का सन्देश दिया। यह भूमि देश-विदेश केे लोगो का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही है। आज दशम् दीक्षान्त समारोह के अवसर पर स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले छात्र/छात्राओ को शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि आप लोग शिक्षा प्राप्त कर अपने विद्यालय का नाम रोशन करें। आप लोग शिक्षा प्राप्त कर समाज में परिवर्तन ला सकते है। आप लोग अपने माता पिता से प्रेरणा लेकर आप लोग समाज को आगे बढ़ाने में काम करे। आज छात्रों की अपेक्षा छात्राओं को अधिक मेडल प्राप्त हुआ है। डिग्री प्राप्त करने में भी छात्राएं आगे है।
उन्होंने मेडल पाने वाले छात्र/छात्राओं के परिजनों को भी बधाई दी। कुलाधिपति ने कहा कि आज नारी किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। दीक्षान्त समारोह पूर्ण होने पर आप लोगो का राष्ट्र सेवा का नया अध्याय प्रारम्भ हुआ है। यह उपाधि एक प्रमाण-पत्र नहीं है। शिक्षा प्राप्त करने का उद्देश्य जीवन यापन करना नहीं है बल्कि राष्ट्र के उत्थान एवं विकास हेतु कार्य करना है। नवाचार के नये द्वार खुल रहे है। आप अपने भविष्य के निर्माता नहीं है बल्कि विकसित भारत के निर्माण स्तम्भ है। जीवन में कितनी भी ऊंचाईयां प्राप्त कर हो अपने संस्कार कभी न भूले, यही भगवान गौतम बुद्ध का सन्देश है।
राज्यपाल ने कहा कि आज का युग तीव्र विकास का युग है। प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। प्राकृतिक संसाधनों का दोहन हो रहा है। सभी युवा नवाचार शिक्षा के अपना योगदान विकसित भारत बनाने में करें। विश्वविद्यालय राष्ट्र को नई दिशा वाला केन्द्र है। हमे जल संचयन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। आने वाले समय में जल एक बड़ी समस्या बन सकता है। उन्होंने कहा कि आप लोग देश को आगे बढ़ाने में सहयोग करे और भारत को वर्ष 2047 तक विकसित देश बनाना है। सरकार के सेवा, सुशासन, जनकल्याण, नवाचार एवं राष्ट्र निर्माण कांे एक सतत यात्रा के रूप में देखे जा सकते है। 140 करोड़ देशवासियों के आकांक्षाओं और संकल्प की कहानी है। भारत आत्मनिर्भर, समावेशी विकास और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि जनधन योजना के माध्यम से करोडों लोगो को बैकिंग सेवा से जोड़ा गया है। स्वच्छ भारत मिशन ने देश में एक जनआन्दोलन के रूप लेकर नयी चेता का संचार किया है। प्रधानमंत्री आवास से गरीबो को आवास, उज्ज्वला योजना से गांव की महिलाओं को धुआं से मुक्ति दिलाया गया है। आयुष्मान भारत योजना से करोड़ो लोगो को स्वास्थ्य लाभ मिला है। कृषि क्षेत्र में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि येाजना अन्तर्गत किसानो को डीबीटी के माध्यम से सुविधा दी गयी है। गांव के विकास को नई गति प्रदान किया गया है। नये भारत के विकास में रेलवे को आधुनिकता प्रदान की है। बन्देभारत, अमृत भारत ट्रेनो को संचालन किया गया है।
मुख्य अतिथि काशी हिन्दू विश्व विद्यालय, वनस्पति विज्ञान प्रो0 मधुलिका अग्रवाल ने दशम् दीक्षान्त समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि आप लोग सबकी अपेक्षाओं को पूरा करें तथा देश का नाम रोशन करें। आने वाले समय में अपने सपनों को साकार करने में सफल हो। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय का गौरव ऊंचा होगा। विकसित भारत के महान संकल्प को सिद्ध करने में आगे बढ़ रहा है 2047 में आजादी के 100 वर्ष पूर्ण होने पर हम आत्मनिर्भर और विश्व गुरु के रूप में खड़े होंगे। प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग इस तरह करें कि आने वाली पीढियां को नुकसान ना हो आने वाली पीढियां को प्राकृतिक संसाधन मिल सके।
विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने गोल्ड मेडल पाने वाले सभी छात्र/छात्राओं को बधाई दी तथा उनके माता-पिता व गुरूजनो को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि आपके नए जीवन का शुभारंभ हो रहा है अपने लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अथक प्रयास किया माता-पिता एवं समाज का योगदान है। सपने वह सार्थक होते हैं जो हमें सोने ना दे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का सपना भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का है आप सभी देश को विकसित बनाने में सहयोग करें।
कुलपति सिद्धार्थ विश्वविद्यालय प्रो0 कविता शाह ने बताया कि मुख्यमंत्री की दृष्टि सदैव विश्वविद्यालय पर रहती है विश्वविद्यालय निरंतर आगे बढ़ रहा है। जून 2015 में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। इस विश्वविद्यालय के अंतर्गत 265 महाविद्यालय आते हैं 2025-26 में परीक्षा पारदर्शी एवं समय से कराई गई। उन्होंने बताया कि समर्थ पोर्टल के माध्यम से सभी महाविद्यालय कम कर रहे हैं।
दशम् दीक्षान्त समारोह कार्यक्रम के अवसर पर राज्यपाल द्वारा कुल 37 स्वर्ण पदक एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया, जिसमें 28 छात्राएं एवं 09 छात्र है। इसके साथ पीएचडी धरको को भी उपाधि देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल द्वारा नवनिर्मित बालगृह किलकारी एवं दिव्यांगजन सुविधायुक्त डिजिटलाइज्ड लाइब्रेरी का लोकार्पण किया गया।
राज्यपाल द्वारा 700 आंगनबाड़ी किट वितरित किया गया। एचपीवी टीकाकरण में अच्छा करने हेतु जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर शिवशरणप्पा जीएन, पुलिस अधीक्षक डा0 अभिषेक महाजन, मुख्य विकास अधिकारी संतकबीर नगर, अपर पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर तथा मुख्य विकास अधिकारी महराजगंज को प्रमाण पत्र दिया गया। राज्यपाल द्वारा गोद लिये गावों के उच्च प्राथमिक विद्यालय, बर्डपुर तथा ककरहवा को प्रधानाचार्य को 50 पुस्तकों का सेट दिया गया। राज्यपाल द्वारा स्वास्थ्य केन्द्र पर एच0पी0वी0 टीकाकरण का शुभारम्भ किया गया।
इस अवसर पर सांसद डुमरियागंज जगदम्बिका पाल, विधायक इटवा/नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय, विधायक कपिलवस्तु श्यामधनी राही, विधायक शोहरतगढ़ विनय वर्मा, जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन, पुलिस अधीक्षक डा0 अभिषेक महाजन, मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह, अपर जिलाधिकारी (वि0/रा0) गौरव श्रीवास्तव, कुल सचिव दीनानाथ यादव, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के दशम् दीक्षान्त समारोह के आयोजन समिति के सदस्य तथा कार्य परिषद के सदस्य तथा सिद्धार्थ विश्वविद्यालय से सम्बद्ध समस्त महाविद्यालयों के प्राचार्य उपस्थित रहे।
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