संविधान रक्षक सेना की राष्ट्रीय बैठक का हुआ आयोजन
लखनऊ। आज जब संविधान पर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष हमले तेज हो रहे हैं, आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं, सामाजिक समानता एवं न्याय की भावना को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं, तब संविधान रक्षक सेना देश की एकता, अखंडता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ी है। इस कड़ी में सेना संगठन द्वारा राष्ट्रीय बैठक शनिवार को लखनऊ में आयोजित की गई।
बैठक मात्र एक सभा नहीं, बल्कि संविधान की रक्षा के लिए एक निर्णायक संकल्प और संगठित संघर्ष की शुरुआत है। संस्थापक निवास मौर्य ने बैठक का शुभारम्भ करते हुए अपने सम्बोधन में कहा कि भारतीय संविधान डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा रचित विश्व का सर्वाधिक प्रगतिशील एवं मानवाधिकार केंद्रित दस्तावेज है, जो शोषित-वंचित वर्गों के लिए समानता, स्वतंत्रता, न्याय एवं सम्मान की गारंटी प्रदान करता है।
उन्होंने संगठन के गठन से अब तक के संघर्षों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया तथा सभी प्रतिभागियों को संविधान के प्रति अटूट निष्ठा एवं निरंतर सतर्कता बनाए रखने का आह्वान किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष सतेंद्र कुशवाहा के कुशल मार्गदर्शन में संगठन निरंतर आगे बढ़ रहा है। संविधान रक्षक सेना संविधान की भावना को गांव-गांव, शहर-शहर पहुंचाने और विरोधी ताकतों के खिलाफ संगठित लड़ाई लड़ने में अग्रणी भूमिका निभा रहा हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि संविधान रक्षक सेना के 10 अटल उद्देश्य जो हमारा मार्गदर्शन करते हैं- संविधान के मूल सिद्धांतों, मूल ढांचे और प्रत्येक प्रावधान की अक्षुण्ण रक्षा। मौलिक अधिकारों, समानता, स्वतंत्रता एवं न्याय की रक्षा हेतु जन-जागरण। दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक, आदिवासी एवं वंचितों के संवैधानिक अधिकारों की मजबूत सुरक्षा। संविधान-विरोधी विचारधारा, नीति या कृत्यों के विरुद्ध संगठित, निर्णायक संघर्ष। लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद एवं संघीय ढांचे को अजेय बनाना। सामाजिक न्याय, आरक्षण व्यवस्था एवं सकारात्मक भेदभाव के प्रावधानों का पूर्ण क्रियान्वयन। भ्रष्टाचार, मनुवाद, जातिवाद, छुआछूत एवं भेदभाव के विरुद्ध संवैधानिक आंदोलन। युवा, छात्रों एवं आम नागरिकों में संविधान के प्रति गहन सम्मान एवं जिम्मेदारी जागृत करना। संविधान के पूर्ण कार्यान्वयन हेतु कानूनी, सामाजिक एवं राजनीतिक सुधारों की जोरदार मांग तथा देश की एकता, अखंडता एवं बंधुत्व को मजबूत कर संविधान की भावना को हर दिल तक पहुंचाना।
बैठक में वर्तमान चुनौतियों का गहराई से विश्लेषण किया गया। भावी रणनीति तैयार की गई, संगठन को और मजबूत बनाया गया तथा आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर जागरण, शांतिपूर्ण प्रदर्शन, कानूनी लड़ाई और जन-संपर्क अभियान की रूपरेखा तय की गई। सभी प्रतिभागियों ने एकजुट होकर शपथ ली कि वे संविधान की रक्षा के लिए हर बलिदान देने को तैयार हैं।
बैठक में वर्तमान संवैधानिक चुनौतियों जैसे आरक्षण व्यवस्था पर बढ़ते प्रश्नचिह्न, सामाजिक न्याय के प्रावधानों पर हमले, संघीय ढांचे की कमजोरी, धर्मनिरपेक्षता पर खतरा तथा मौलिक अधिकारों का संकुचन का विस्तृत विश्लेषण किया गया। प्रतिभागियों ने सर्वसम्मति से आगामी 6 माह में देशव्यापी संविधान जागरण अभियान चलाने, प्रत्येक जिले में संविधान अध्ययन मंडल एवं कानूनी सहायता सेल स्थापित करने आरक्षण रक्षा, सामाजिक न्याय एवं संविधान संरक्षण के लिए शांतिपूर्ण राष्ट्रीय प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार करने, संविधान-विरोधी विधेयकों-नीतियों के विरुद्ध कानूनी याचिकाओं एवं जन-दबाव अभियान चलाने, युवा एवं छात्र विंग को विशेष रूप से सशक्त बनाने का निर्णय लिया गया। संविधान रक्षक सेना संवैधानिक मूल्यों में आस्था रखने वाले नागरिकों, बुद्धिजीवियों, विधिवेत्ताओं, शिक्षाविदों, छात्र-युवाओं एवं सामाजिक संगठनों से अपील करती है कि वे इस राष्ट्रीय संकल्प में सक्रिय सहभागिता प्रदान करें।
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