यूपीएसआईएफएस में “क्राइम सीन मैनेजमेन्ट” कोर्स के पांचवें बैच का प्रशिक्षण सकुशल सम्पन्न

Jul 24, 2026 - 19:38
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यूपीएसआईएफएस में “क्राइम सीन मैनेजमेन्ट” कोर्स के पांचवें बैच का प्रशिक्षण सकुशल सम्पन्न

लखनऊ, संवाददाता। उत्तर प्रदेश स्टेट  इंस्टीट्यूट ऑफ़ फॉरेंसिक साइंस लखनऊ में “क्राइम सीन मैनेजमेन्ट” कोर्स पूर्ण होने के उपरांत शुक्रवार को समापन किया गया, जिसके मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ0 प्रशांत कुमार पूर्व पुलिस महानिदेशक थे। यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी एवं उप महानिरीक्षक हेमराज मीना ने स्मृति चिन्ह प्रदान कर मुख्य अतिथि को सम्मानित किया। इस कोर्स में प्रदेश के विभिन्न कमिश्नरेट एवं जनपदो से आरक्षी से लेकर निरीक्षक रैंक के कुल 94 पुलिस अधिकारियों ने प्रतिभाग किया था। उल्लेखनीय है कि 42 दिवस तक चले इस कोर्स मे विषय विशेषज्ञों द्वारा क्राइम सीन मैनेजमेन्ट की बारीकियो सहित साइबर एवं फोरेंसिक विषयों का भी गहन अध्ययन कराया गया।
 
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ0 प्रशांत कुमार ने सभागार में उपस्थित समस्त प्रशिक्षणार्थियों एवं शैक्षणिक संवर्ग के सदस्यों को सम्बोधित करते हुए कहा कि फोरेंसिक विज्ञान एक ऐसा क्षेत्र है जो विज्ञान के सिद्धांतों को अपराध अन्वेषण में प्रयोग करता है, यह एक बहुविकल्पित क्षेत्र है जिसमें विभिन्न विज्ञानों का समावेश होता है, जैसे की रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान और मनोविज्ञान आदि। 

उन्होंने कहा कि फोरेंसिक विज्ञान का उद्देश्य अपराध की जांच में मदद करना और न्याय प्रणाली को मजबूती प्रदान करना है। फोरेंसिक विज्ञान के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के विश्लेषण किया जाते हैं जैसे कि डीएनए, उंगलियों के निशान तथा अन्य भौतिक साक्ष का भी विश्लेषण होता है यह विश्लेषण अपराध स्थल से एकत्रित साक्ष के आधार पर किए जाते हैं और उनका उपयोग अपराधी की पहचान करने और अपराध की जांच में मदद करने के लिए किया जाता है। साक्ष्यों का संकलन उच्च कोटि की होनी चाहिए ताकि उनका उपयोग सजा दिलाने सक्षम  हो सके। उन्होंने एक अच्छे पुलिस अधिकारी के गुण पर भी प्रकाश डाला।
 
डॉ0 प्रशांत कुमार ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार ने फोरेंसिक विज्ञान की विश्व स्तरीय शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से इस संस्थान की स्थापना किया। इस संस्थान का उद्देश्य फोरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विश्व स्तरीय मानव संसाधन तैयार कर शोधपरक शिक्षा को बढ़ावा देना है। यहां से उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त किए हुए छात्र देश के विभिन्न क्षेत्रों में फोरेंसिक विशेषज्ञों के रूप में अपनी सेवाएं दे सकेंगे।

उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि आप सभी ने लगन एवं परिश्रम के साथ इस कोर्स को किया है। मैं यह भी आशा करता हूं कि जनपदों अपने यूनिट्स में जाकर के टीओटी के रूप में अन्य कर्मियों को भी प्रशिक्षित करेंगें ताकि अन्य का भी ज्ञानवर्धन और कार्य क्षमता बढ़ सके द्य उन्होंने प्रशिक्षण बेहतर ढंग से पूर्ण कराने पर संस्थापक निदेशक डॉ जी के गोस्वामी का आभार भी वयक्त किया।

इस अवसर पर संस्थापक निदेशक डॉ0 जी.के गोस्वामी ने कहा कि आप अपने पुलिसिंग के कार्य को सदैव कानून से जोड़कर चलें अन्यथा जब भी आप द्वारा किये गये विवेचनात्मक प्रकरण का कोर्ट में ट्रायल होगा तो बिना प्रभावी साक्ष्य के कारणों से आपका न्यायिक उद्देश्य विफल हो जायेगा और यदि आप अपने कार्याे को कानून का पालन करते हुए करेंगे तो आप किसी को न्याय दिलाने में सफल हो सकेंगे। जब तक हम कानून के साथ विज्ञान का संगम नहीं करेंगे तब तक वह कानून रह जायेगा फोरेंसिक विज्ञान नहीं बन पायेगा। उन्होंने कहा कि असली न्याय कि जो सीढी है वह पुलिस तैयार करती है यदि साक्ष्यो कि गुणवत्ता ही दूषित हो जायेगी तो कोई भी जज उस पर न्याय नहीं दे पायेगा और आप अन्याय के भागीदार बन जायेंगे। इस कार्य में क्राइम सीन मैनेजर की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

कार्यक्रम के अंत में उप महानिरीक्षक हेमराज मीना ने सभागार में उपस्थित समस्त अधिकारियों को  धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी ने किया। इस अवसर पर उप निदेशक जितेन्द्र श्रीवास्तव ने छः सप्ताह तक चले इस कोर्स से सम्बंधित विषयों पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर उप निदेशक चिरंजिब मुखर्जी, अतुल यादव, डॉ0 पोरवी सिंह, विवेक कुमार, डॉ0 सपना, डॉ0 श्रुतिदास गुप्ता, डॉ0 शाश्या मिश्र, डॉ0 स्वप्निल, डॉ0 पलक, आरआई शैलेन्द्र सिंह एवं कार्तिकेय सहित अन्य उपस्थित रहे।

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