डीएम रविन्द्र कुमार की पहल से लंबित दिव्यांग प्रमाण पत्रों के निस्तारण में आजमगढ़ ने रचा नया उदाहरण
आजमगढ़, संवाददाता। दिव्यांगजनों के अधिकार, सम्मान और सुविधा को प्राथमिकता देते हुए योगी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर प्रभावी ढंग से पहुंचाने की दिशा में आजमगढ़ में उल्लेखनीय पहल की गई है। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार के विशेष प्रयासों से दिव्यांग प्रमाण पत्र एवं यूडीआईडी कार्ड से संबंधित लंबित आवेदनों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
जिलाधिकारी ने बताया कि यूनिक डिसेबिलिटी आईडी यानी यूडीआईडी कार्ड भारत सरकार की ऐसी महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य देशभर के दिव्यांगजनों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करना तथा उन्हें सरकारी योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ पारदर्शी और सुगम तरीके से उपलब्ध कराना है। यूडीआईडी कार्ड के माध्यम से दिव्यांगजनों को पेंशन, छात्रवृत्ति एवं विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में सुविधा होती है। साथ ही रेलवे पास एवं बस यात्रा में छूट जैसी सुविधाओं के लिए भी यह उपयोगी है। देश के विभिन्न हिस्सों में पहचान के लिए अलग-अलग दस्तावेज साथ रखने की आवश्यकता को भी यह व्यवस्था कम करती है।
दिव्यांग प्रमाण पत्र एवं यूडीआईडी कार्ड के लिए दिव्यांगजन ेूंअसंउइंदबंतकण्हवअण्पद पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा गठित दिव्यांग बोर्ड के समक्ष उपस्थित होकर दिव्यांगता की जांच करानी होती है। जांच एवं निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र आवेदक को दिव्यांगता प्रमाण पत्र एवं यूडीआईडी कार्ड जारी किया जाता है।
31 अगस्त 2026 तक जनपद आजमगढ़ में दिव्यांग प्रमाण पत्र के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पोर्टल पर 8,950 से अधिक आवेदन लंबित थे। लंबित प्रकरणों के कारण पात्र दिव्यांगजनों को विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने में कठिनाई हो रही थी। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने दिव्यांग बोर्ड की कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए 01 जुलाई 2026 से बोर्ड की बैठक सप्ताह में दो दिन के स्थान पर सोमवार, मंगलवार, बुधवार एवं बृहस्पतिवार कुल लगातार चार दिन ओपीडी के बाद आयोजित कराने के निर्देश दिए। इस विशेष पहल का सीधा लाभ दिव्यांगजनों को मिला। अभियान के दौरान 8,900 से अधिक लंबित प्रकरणों का निस्तारण किया गया तथा 1,891नए दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किए गए। परिणामस्वरूप अब जनपद में मात्र 330 आवेदन लंबित हैं। यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक कार्यक्षमता को दर्शाती है, बल्कि दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन की प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट करती है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर अभियान के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि किसी भी पात्र दिव्यांगजन का आवेदन केवल प्रक्रिया संबंधी कारणों से लंबित या निरस्त न हो। इसके लिए आवेदकों को दिव्यांग बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने के संबंध में पोर्टल के माध्यम से न्यूनतम पांच बार संदेश भेजे गए। इसके बाद भी उपस्थित न होने वाले आवेदकों से दूरभाष के माध्यम से संपर्क किया गया और उन्हें बोर्ड के समक्ष उपस्थित होकर जांच कराने के लिए प्रेरित किया गया। सभी प्रयासों के बाद भी बोर्ड में उपस्थित न होने वाले आवेदनों को ही नियमानुसार निरस्त किया गया। इस संवेदनशील व्यवस्था से जहां पात्र लाभार्थियों को अपना प्रमाण पत्र प्राप्त करने का पर्याप्त अवसर मिला, वहीं अनावश्यक रूप से आवेदन निरस्त होने की संभावना भी कम हुई।
आजमगढ़ में लंबित आवेदनों के त्वरित निस्तारण के लिए किए गए विशेष प्रयास यह संदेश देते हैं कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना और उसकी समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान करना प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। दिव्यांगजनों के सम्मान, अधिकार और स्वावलंबन की दिशा में आजमगढ़ की यह पहल संवेदनशील सुशासन का प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आई है।
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