जिलाधिकारी ने की गो आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं की समीक्षा
अमेठी, संवाददाता। जनपद में संचालित गो आश्रय स्थलों पर निराश्रित गोवंशों के संरक्षण एवं मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी संजय चौहान ने आज कलेक्ट्रेट सभागार में गो संरक्षण अनुश्रवण एवं मूल्यांकन समिति की बैठक कर संबंधित अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा की।
बैठक में उन्होंने गो आश्रय स्थलों पर हरा चारा, भूसा, पशु आहार, स्वच्छ पेयजल, शेड, चिकित्सीय सुविधाएं तथा गोवंशों की सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं का गहन परीक्षण करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने ब्लॉक स्तर पर आयोजित की जाने वाली गो संरक्षण संबंधी बैठकों की समीक्षा की। समीक्षा में पाया गया कि कई विकासखंडों में अब तक ब्लॉक स्तरीय बैठकें आयोजित नहीं कराई गई हैं। इस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए सभी खंड विकास अधिकारियों को तत्काल ब्लॉक स्तरीय बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि इन बैठकों में गौशालाओं की समस्याओं, हरे चारे की उपलब्धता, बीमार गोवंशों के उपचार, पेयजल व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा कर प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए। निराश्रित गोवंशों के संरक्षण की प्रगति की समीक्षा के दौरान विकासखंड संग्रामपुर, भेंटुआ, बहादुरपुर, शाहगढ़, मुसाफिरखाना, जगदीशपुर तथा शुकुल बाजार में शून्य प्रगति पाए जाने पर जिलाधिकारी ने गंभीर नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित खंड विकास अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश देते हुए स्पष्ट कहा कि शासन की प्राथमिकता वाले इस कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी ने सभी नोडल अधिकारियों से जनपद की प्रत्येक गौशाला में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी गो आश्रय स्थलों पर गोवंशों के लिए पर्याप्त मात्रा में पशु आहार, भूसा और हरे चारे की उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जाए। साथ ही वर्तमान मौसम को देखते हुए गोवंशों की सुरक्षा, शेड की व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को समयबद्ध ढंग से पूर्ण किया जाए।
उन्होंने समस्त नोडल अधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों तथा पशु चिकित्साधिकारियों को निर्देशित किया कि वे नियमित रूप से गौशालाओं का निरीक्षण करें और व्यवस्थाओं की सतत निगरानी रखें। पशु चिकित्सकों को विशेष रूप से निर्देश दिए गए कि वे नियमित रूप से गौशालाओं का भ्रमण कर बीमार एवं कमजोर गोवंशों का उपचार करें तथा उनके स्वास्थ्य की निगरानी सुनिश्चित करें। बैठक में सहभागिता योजना के अंतर्गत गोवंशों की सुपुर्दगी एवं भुगतान की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि शासन की निर्धारित गाइडलाइन के अनुरूप पात्र व्यक्तियों को गोवंश सुपुर्द किए जाएं तथा भुगतान की समस्त कार्रवाई समयबद्ध रूप से पूरी की जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि सहभागिता योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से निराश्रित गोवंशों के संरक्षण को और मजबूती मिलेगी। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को क्षेत्रीय भ्रमण बढ़ाने के निर्देश देते हुए कहा कि यदि कोई निराश्रित गोवंश खुले में घूमता हुआ मिले तो उसे तत्काल निकटतम गो आश्रय स्थल में संरक्षित कराया जाए। उन्होंने लोगों को जागरूक करने पर भी जोर दिया और कहा कि पशुपालकों को अपने गोवंशों को बेसहारा न छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाए। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गोवंश छोड़ता हुआ पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
बैठक में जिलाधिकारी ने गौशालाओं में अभिलेखों एवं रजिस्टरों के सुव्यवस्थित रखरखाव पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक निरीक्षण अधिकारी निरीक्षण के दौरान अपनी टिप्पणियां रजिस्टर में अनिवार्य रूप से दर्ज करें तथा पाई गई कमियों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित कराएं। जिलाधिकारी ने कहा कि निराश्रित गोवंशों के संरक्षण एवं गो आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं की समीक्षा मुख्यमंत्री स्तर एवं शासन स्तर पर लगातार की जा रही है। इसलिए सभी अधिकारी इस कार्य को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतें। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि गोवंश संरक्षण संबंधी कार्यों में उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी पूजा साहू, जिला विकास अधिकारी वीरभानु सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी मनोज त्यागी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जी.के. शुक्ला, समस्त खंड विकास अधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी तथा संबंधित नोडल अधिकारी उपस्थित रहे।
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