मुख्य सचिव की अध्यक्षता में साइबर अपराधों के रोकथाम के लिए उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक सम्पन्न
लखनऊ, संवाददाता। मुख्य सचिव एस.पी.गोयल की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें उत्तर प्रदेश साइबर पुलिस की कार्यप्रणाली की बारीकियों का गहन संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री की “प्रगति” समीक्षा के अंतर्गत साइबर अपराध से संबंधित नौ प्राथमिकता बिंदुओं पर उत्तर प्रदेश की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें। साइबर अपराधियों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कार्रवाई की जाए तथा ऐसे मामलों की नियमित निगरानी की जाए।
बैठक में आमजन को साइबर ठगी से बचाने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया। साइबर जागरूकता के संबंध में मुख्य सचिव ने साइबर अपराध मुख्यालय के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए निर्देश दिए कि सभी विभागों को साइबर अपराध मुख्यालय से समन्वय स्थापित करते हुए जागरूकता में अपनी भूमिका निभाने की आवश्यकता है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी विभागों को इस आशय का पत्र निर्गत किया जाए। हर विभाग इस हेतु एक नोडल अधिकारी नामित करें, जो साइबर अपराध मुख्यालय के संपर्क में रहे और साइबर अपराध मुख्यालय से प्राप्त जागरूकता सामग्री को अपने-अपने विभाग में जमीनी स्तर तक अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य करें।
उन्होंने निर्देश दिए कि उत्तर प्रदेश राज्य साइबर समन्वय केंद्र की अधिसूचना शीघ्र निर्गत करायी जाए। ई-जीरो एफ.आई.आर. तंत्र को शीघ्र क्रियाशील किया जाए। “समग्र शासन” दृष्टिकोण के अंतर्गत समस्त शासकीय विभाग समन्वित रूप से कार्य करते हुए यह सुनिश्चित करें कि साइबर जागरूकता प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा राज्यव्यापी आसूचना-आधारित साइबर अभियान “ऑपरेशन साइबर वज्र” को निरंतर सुदृढ़ एवं अधिक प्रभावी बनाया जाए।
बैठक में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने, डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देने तथा नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदमों पर विस्तृत चर्चा की गई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को साइबर हेल्पलाइन और शिकायत निवारण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए, ताकि पीड़ितों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराई जा सके। साथ ही कानून प्रवर्तन एजेंसियों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर भी बल दिया गया।
उन्होंने निर्देश दिए कि सोशल मीडिया, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों से लोगों को डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध के नए तरीकों के प्रति जागरूक किया जाए।
मुख्य सचिव द्वारा समस्त मापदंडों पर उत्तर प्रदेश की उल्लेखनीय प्रगति एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की गई। उन्होंने निर्देशित किया कि प्रदेश को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर स्थापित करने एवं इस स्थान को बनाए रखने हेतु निरंतर सुनियोजित प्रयास किए जाएं।
बिन्दुवार समीक्षा के दौरान पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) बी0के0सिंह ने बताया कि राज्य साइबर समन्वय केंद्र की अधिसूचना-साइबर अपराध से संबंधित समस्त इकाइयों के समन्वय हेतु राज्य स्तर पर “उत्तर प्रदेश राज्य साइबर समन्वय केंद्र” की स्थापना प्रस्तावित है। इसकी अधिसूचना का प्रारूप तैयार है।
साइबर समन्वय केन्द्र के आठ में से छह घटक क्रियाशील हो चुके हैं तथा शेष दो घटकों की स्थापना की कार्यवाही प्रगति पर है। इस क्षेत्र में प्रदेश की प्रगति देश में उल्लेखनीय है। निरपेक्ष एफआईआर पंजीकरण हेतु ई-जीरो एफआईआर तंत्र विकसित किया जा रहा है। पुलिस महानिदेशक, साइबर अपराध द्वारा अवगत कराया गया कि यह तंत्र अपने अंतिम चरण में है।
शिकायत निवारण एवं धनराशि वापसी, सहयोग पोर्टल का उपयोग तथा समन्वय पोर्टल - उपर्युक्त तीनों बिंदुओं से संबंधित विभिन्न पोर्टल एवं मॉड्यूल भली-भांति क्रियाशील हैं। इन समस्त मापदंडों पर उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन देश में अग्रणी है। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा राज्यव्यापी आसूचना-आधारित साइबर अभियान “ऑपरेशन साइबर वज्र” में प्रारंभिक सफलता प्राप्त की गई है। साइबर अपराध अन्वेषण हेतु पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण में साइट्रेन प्लेटफॉर्म के उपयोग में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। साइबर अपराध के प्रति जन-जागरूकता हेतु विभिन्न श्रेणियों के लक्षित समूहों एवं स्थलों हेतु जागरूकता सामग्री तैयार की गई है।
बैठक में सचिव गृह मोहित गुप्ता, साइबर अपराध मुख्यालय से पुलिस उप महानिरीक्षक, पुलिस अधीक्षक, अपर पुलिस अधीक्षक (साइबर ऑपरेशन्स) आदि वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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