मंडलीय औद्यानिक उन्नयन गोष्ठी में अमेठी के 200 कृषकों ने किया प्रतिभाग
अमेठी, संवाददाता। उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा आयोजित मंडलीय औद्यानिक उन्नयन गोष्ठी में जनपद अमेठी के किसानों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए आधुनिक बागवानी एवं उद्यानिकी तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। यह गोष्ठी मंगलवार को श्री महावीर सिंह स्मारक महाविद्यालय, कठवारा, जनपद रायबरेली में आयोजित की गई।
जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह ने बताया कि कार्यक्रम में जनपद अमेठी के लगभग 200 कृषकों ने विभाग द्वारा आरक्षित वाहनों के माध्यम से प्रतिभाग किया। गोष्ठी का उद्देश्य किसानों को उद्यानिकी क्षेत्र में नवीन तकनीकों, आधुनिक खेती के तौर-तरीकों तथा विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराना था, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके और वे उन्नत खेती को अपनाकर आत्मनिर्भर बन सकें।
गोष्ठी के दौरान उद्यान विभाग के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों द्वारा किसानों को फल, सब्जी, मसाला एवं पुष्प उत्पादन से संबंधित आधुनिक तकनीकों, संरक्षित खेती, जैविक खेती, ड्रिप सिंचाई, पॉलीहाउस, शेडनेट हाउस तथा उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। साथ ही विभागीय योजनाओं के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान एवं लाभों की जानकारी भी किसानों को प्रदान की गई।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण जनपद अमेठी के तीन प्रगतिशील कृषकों का सम्मान रहा, जिन्हें उद्यानिकी क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान एवं नवाचार आधारित खेती के लिए माननीय उद्यान मंत्री जी के कर-कमलों द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं पांच-पांच पौधे प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाले किसानों में विकास खंड सिंहपुर के ग्राम सिंहपुर निवासी रावत सुरेंद्र बहादुर सिंह शामिल रहे, जिन्होंने पॉलीहाउस में शिमला मिर्च की उन्नत खेती कर क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत का कार्य किया है। इसी प्रकार विकास खंड बाजारशुक्ल के ग्राम मंडवा निवासी चंद्रशेखर शुक्ला को ड्रैगन फ्रूट की सफल व्यावसायिक खेती के लिए सम्मानित किया गया। वहीं विकास खंड बाजारशुक्ल के ग्राम रसूलपुर निवासी विजय कुमार को स्ट्रॉबेरी की खेती में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त करने पर प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
किसानों की सफलता की कहानियों को कार्यक्रम में उपस्थित अन्य किसानों के समक्ष भी साझा किया गया, जिससे कृषकों को परंपरागत खेती से आगे बढ़कर उद्यानिकी आधारित लाभकारी खेती अपनाने की प्रेरणा मिली। विशेषज्ञों ने बताया कि उच्च मूल्य वाली फसलों एवं संरक्षित खेती तकनीकों को अपनाकर किसान कम भूमि एवं सीमित संसाधनों में भी अधिक उत्पादन एवं बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं। कार्यक्रम के समापन अवसर पर गोष्ठी में शामिल सभी कृषकों को पर्यावरण संरक्षण एवं पौधरोपण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पांच-पांच पौधे निःशुल्क वितरित किए गए। किसानों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से उन्हें नई तकनीकों की जानकारी प्राप्त होती है तथा कृषि को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिलती है।
जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह ने बताया कि उद्यान विभाग किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर रहा है तथा किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने किसानों से विभागीय योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने एवं उद्यानिकी फसलों की उन्नत खेती अपनाने का आह्वान किया।
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