नम आंखों से दी अग्निवीर समुद्र सिंह को अंतिम विदाई
अलवर। जिले के केसरपुर गांव निवासी अग्निवीर समुद्र सिंह गुर्जर (24) की पार्थिव अस्थि गुरुवार को शहीद होने के 80 दिन बाद उनके पैतृक गांव पहुंची, जहां उनकी श्रद्धांजलि यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए।
समुद्र 14 अगस्त 2026 को अरुणाचल प्रदेश की दिबांग वैली में हुए बादल फटने आए भूस्खलन में लापता हो गए थे, जिसके बाद से उनका पार्थिव शव नहीं मिला था। 76 दिन बाद उसका शव सेना को मिला, जिसके बाद समुद्र सिंह के परिजनों के डीएनए सैम्पल लेकर पहचान की गई ओर गुरुवार को अस्थियां उनके गांव पहुंची, जहां उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई ओर सेना के जवानों ने 3 राउंड फायरिंग कर अंतिम सलामी दी। समुद्र सिंह की मई 2026 में ही शादी हुई थी। वह दो बहनों का इकलौता भाई था। अग्निवीर की अंतिम श्रद्धांजलि यात्रा में हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ बढ़ाते दिखाई दी और नाम आंखों से शहिद के नाम की जयकारे लगाए गए।
लापता होने के करीब 80 दिन बाद सेना ने 3 नवंबर 2026 को उनके परिवार को अरुणाचल प्रदेश बुलाया और समुद्र के पहचान की जानकारी दी। परिवार ने वहीं उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया। गुरुवार को अलवर शहर से 6 किलोमीटर दूर उनके पैतृक गांव केसरपुर तक सैन्य सम्मान के साथ श्रद्धांजलि यात्रा (अस्थियों के साथ) निकाली गई। जब सैन्य अधिकारियों ने उनकी अस्थियां और तिरंगा परिवार को सौंपे तो उनकी मां रोते-रोते बेसुध हो गईं। उनकी पत्नी को भी परिवार ने बड़ी मुश्किल से संभाला। शहीद की अंतिम यात्रा में मेजर रायगोंड चटरक्की ने पुष्प चक्र अर्पित किया।
मेजर रायगोंड चटरक्की ने बताया कि अग्निवीर समुद्र सिंह गुर्जर जिस इलाके में ड्यूटी पर तैनात थे, वह बेहद दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र है। वहां जवानों को दिन-रात खराब मौसम और प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियों के बीच देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। इस इलाके में बादल फटने और भूस्खलन का खतरा बना रहता है। समुद्र सिंह ऐसे कठिन हालात में भी अपनी ड्यूटी पर डटे रहे। बादल फटने की घटना में कई जवान लापता हुए थे, जिनमें समुद्र सिंह भी शामिल थे। सेना उन्हें सम्मान के साथ गांव लेकर पहुंची।
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