मोबाइल से बनाई दूरी, प्रतिभा से रचा मुकाम-सात वर्षीय शौर्य हुए सम्मानित
गोण्डा, संवाददाता। मोबाइल की चकाचौंध से दूरी बनाकर पढ़ाई, खेल और रचनात्मक गतिविधियों में अपनी प्रतिभा का परचम लहराने वाले सेंट जॉन्स स्कूल, ग्रेटर नोएडा के कक्षा तीन के सात वर्षीय छात्र शौर्य श्रीवास्तव ने कम उम्र में अनुशासन और लगन की ऐसी मिसाल पेश की है, जो आज के बच्चों के लिए प्रेरणादायी संदेश है। शौर्य की इस उपलब्धि पर प्रगतिशील विचार मंच, ग्रेटर नोएडा ने प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित कर उसका उत्साहवर्धन किया।
नगर के आवास विकास कॉलोनी निवासी डॉ. जी.सी. श्रीवास्तव के सुपौत्र शौर्य श्रीवास्तव ने लगातार एक वर्ष तक मोबाइल से दूरी बनाए रखी। मोबाइल के बजाय उसने अपना समय पढ़ाई और खेलकूद को दिया। परिणामस्वरूप उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मैथ ओलम्पियाड, स्वीमिंग, कराटे चैम्पियनशिप और स्केटिंग जैसी विभिन्न विधाओं में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया।
शौर्य की लगन, अनुशासन और उपलब्धियों से प्रभावित होकर मंच की ओर से उसे शील्ड, मोमेंटो, इलेक्ट्रॉनिक कार, अमेरिकन चॉकलेट सहित कई आकर्षक उपहार प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर शौर्य के चेहरे पर खुशी और आत्मविश्वास देखते ही बन रहा था।
रविवार को आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में शौर्य के माता-पिता को भी विशेष रूप से मंच पर आमंत्रित कर सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि बच्चे की सफलता केवल उसकी प्रतिभा का परिणाम नहीं होती, बल्कि उसके पीछे माता-पिता के संस्कार, त्याग, अनुशासन और निरंतर प्रोत्साहन की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शौर्य के माता-पिता ने उसे मोबाइल की अनावश्यक निर्भरता से दूर रखकर जिस प्रकार पढ़ाई और खेल की ओर प्रेरित किया, वह अन्य अभिभावकों के लिए भी अनुकरणीय है।
वक्ताओं ने कहा कि सात वर्ष की उम्र में शौर्य द्वारा मोबाइल से दूरी बनाकर अपनी ऊर्जा को शिक्षा और खेल में लगाना एक छोटी उपलब्धि नहीं, बल्कि बदलते दौर में बच्चों के लिए बड़ा संदेश है। ऐसे बच्चे अपनी प्रतिभा से परिवार का गौरव बढ़ाने के साथ समाज और देश का नाम भी रोशन करते हैं।
शौर्य की उपलब्धियों ने समारोह में उपस्थित लोगों को विशेष रूप से प्रभावित किया। उपस्थित अभिभावकों ने भी उसके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों को मोबाइल की आभासी दुनिया के बजाय किताब, खेल का मैदान और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
अपनी उपलब्धियों का श्रेय पूछे जाने पर शौर्य ने सहज भाव से अपनी मां प्रिया श्रीवास्तव नानी गीता और अपने गुरुजनों को दिया। उसकी यह विनम्रता भी समारोह में चर्चा का विषय रही। शौर्य की प्रतिभा, अनुशासन और संस्कारों ने यह संदेश दिया कि उम्र छोटी हो सकती है, लेकिन लक्ष्य बड़ा हो तो उपलब्धियों की ऊंचाई उम्र की मोहताज नहीं होती।
What's Your Reaction?