डेटा की शक्ति से यूपी में खुलेंगे निवेश, नवाचार और रोजगार के नए अवसर - सीएम योगी
लखनऊ (संवाददाता)। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) में आयोजित तीन-दिवसीय अंतराषर््ट्रीय सम्मेलन ‘टेक संगम 2026’ के विशेष सत्र का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ0 जीके गोस्वामी एवं अपर निदेशक संजीव सुमन ने प्रतीक चिन्ह एवं अंगवस्त्रं प्रदान कर सम्मानित किया।
डॉ0 गोस्वामी ने इस अवसर पर मंचासीन विधायक राजेश्वर सिंह, नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, इंडियानापोलिस यूनिवर्सिटी (अमेरिका) की प्रेसिडेंट प्रो. तनुजा सिंह, डिफेंस साइबर एजेंसी के महानिदेशक रियर एडमिरल संजय सचदेवा को भी प्रतीक चिन्ह एवं अंगवस्त्रं प्रदान कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर सभागार को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर फॉरेंसिक, क्वांटम डेटा प्रोटेक्शन एवं कानूनी अनुपालन (Legal Compliance) के अभिसरण (Convergence) पर आधारित इस प्रतिष्ठित सम्मेलन ने उत्तर प्रदेश को डेटा और एआई के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाने का स्पष्ट संदेश दिया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में पांच बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर का एक सशक्त और व्यापक नेटवर्क तैयार किया जाएगा। डेटा की असीम शक्ति का उपयोग करते हुए उत्तर प्रदेश में निवेश, नवाचार और रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि तकनीक की शक्ति का उपयोग केवल लोक कल्याण के माध्यम के रूप में होना चाहिए, न कि किसी भी प्रकार के संकट या व्यवधान के कारण के रूप में।
मुख्यमंत्री ने ‘टेक संगम 2026’ की वैचारिक गहराई को समझाते हुए इसे विज्ञान, तकनीक
और भारतीय विवेक का अनूठा संगम करार दिया। उन्होंने वर्ष 2025 के प्रयागराज महाकुंभ के त्रिवेणी संगम का स्मरण करते हुए कहा कि जैसे महाकुंभ में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम होता है, वैसे ही ‘टेक संगम 2026’ भी एक नया और दूरदर्शी दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक तभी मानव जाति के कल्याण के लिए सार्थक हो सकते हैं, जब उनमें भारतीय चिंतन और नैतिक मूल्यों का समावेश हो। हमारी प्राचीन परंपरा में कहा गया है, ‘विद्या ददाति विनयम् अर्थात विद्या का अंतिम उद्देश्य विनय और उसके साथ विवेक का विकास करना है। इसी मूल भावना को आत्मसात करते हुए यूपीएसआईएफएस ने इस अंतर्राष्ट्रीय आयोजन की रूपरेखा तैयार की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज डीपफेक, साइबर फ्रॉड, पहचान की चोरी (आइडेंटिटी थेफ्ट) और डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में केवल उन्नत तकनीक विकसित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे पूरी तरह सुरक्षित, विश्वसनीय और लोकहितकारी बनाना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ‘इंडिया एआई मिशन’ और ‘नेशनल क्वांटम मिशन’ के माध्यम से मिशन मोड में कार्य कर रही है। स्वदेशी एआई क्षमताओं का विकास, मजबूत कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन और सुरक्षित एआई इकोसिस्टम का निर्माण आज की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।
न्यायिक प्रक्रिया और अपराध अनुसंधान के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलावों का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि वैज्ञानिक साक्ष्यों की समय पर उपलब्धता से न्यायालयों में ‘तारीख पर तारीख’ मिलने का पुराना सिलसिला हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा। उन्होंने 2017 की स्थिति को याद करते हुए बताया कि तब डीएनए जांच के लिए दस-दस साल पुराने सैंपल लंबित पड़े रहते थे, जिससे अपराधियों को कानूनी खामियों का फायदा उठाकर बचने का पूरा अवसर मिल जाता था। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने प्रदेश की सभी 18 पुलिस रेंज में अत्याधुनिक फॉरेंसिक लैब स्थापित करने का बीड़ा उठाया, जिनमें से 12 प्रयोगशालाएं बनकर पूरी तरह तैयार हो चुकी हैं और शेष पर कार्य अंतिम चरण में है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से उत्तर प्रदेश में 150 से अधिक फॉरेंसिक वैन तैनात की गई हैं, जिससे अपराध स्थल से तुरंत वैज्ञानिक नमूने एकत्र करना संभव हो पाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि फॉरेंसिक वैन के संचालन के लिए आवश्यक 700 विशेषज्ञों की मांग को पूरा करने के लिए इसी संस्थान में पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, जिसके तहत अब तक 1,000 से अधिक पुलिस अधिकारी प्रशिक्षित हो चुके हैं। इसके साथ ही, यूपीएसआईएफएस देश के उन चुनिंदा अग्रणी संस्थानों में शामिल हो गया है, जिन्होंने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के अंतर्गत पूर्णतः स्वचालित कंसेंट मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया है। संस्थान में ‘लॉ विद लैब’ की अवधारणा के माध्यम से कानून और विज्ञान के समन्वय को संस्थागत रूप दिया जा रहा है, जिससे भविष्य के लिए उच्च कोटि के फॉरेंसिक विशेषज्ञ और शोधार्थी तैयार हो रहे हैं।
प्रदेश के आर्थिक, औद्योगिक और तकनीकी विकास का व्यापक खाका खींचते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक उत्तर प्रदेश में 5 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करना है। इसके लिए प्रदेशभर में पांच बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर का एक मजबूत नेटवर्क स्थापित किया जा रहा है। डेटा की इसी अपार शक्ति का उपयोग कर उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख एआई और डेटा हब बनाया जा रहा है। इसके अलावा, नोएडा में उत्तर भारत की पहली अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर फैब यूनिट (चिप फैक्ट्री) की स्थापना का कार्य तेजी से चल रहा है और राजधानी लखनऊ को देश की पहली श्एआई सिटीश् के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आज बेटियां रात की शिफ्ट में काम करने के बाद भी पूरी तरह सुरक्षित महसूस करती हैं और बिना किसी भय के अपने घरों को लौटती हैं। यह इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश में आम नागरिक के भीतर सुशासन, सुरक्षा और न्याय व्यवस्था के प्रति अटूट विश्वास स्थापित हो चुका है।
पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा कि यूपी में रिसर्च एंड डेवलपमेंट को आगे बढ़ाने में मुख्यमंत्री योगी का मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। इस सम्मेलन में एआई, साइबर फॉरेंसिक, लीगल कम्प्लायंस और स्मार्ट डिवाइसेस की सुरक्षा जैसे भविष्य के विषयों पर विशेषज्ञों ने सार्थक चर्चा की है। उन्होंने डीपफेक और हिंसक सामग्री जैसी भ्रामक सूचनाओं को पुलिसिंग के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि इनसे निपटने के लिए डिजिटल फॉरेंसिक को कानून से जोड़ना जरूरी है। नए कानूनों के बाद वैज्ञानिक जांच का महत्व बढ़ा है जिसमें यूपीएसआईएफएस 5000 से अधिक पुलिसकर्मियों व विद्यार्थियों को प्रशिक्षित कर पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा कर रहा है।
इंडियानापोलिस यूनिवर्सिटी की प्रेसिडेंट प्रो. तनुजा सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डॉ. जी. के. गोस्वामी के अतुलनीय मार्गदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि इनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में अनुसंधान, तकनीक और फॉरेंसिक के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हो रहा है जिससे निवेश का स्तर काफी बढ़ा है। प्रो. सिंह ने कहा कि यूपीएसआईएफएस बहुत कम समय में वैश्विक स्तर पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाने में पूरी तरह सफल रहा है।
यूपीएसआईएफएस के निदेशक डॉ. जी. के. गोस्वामी ने अतिथियों का आभार जताते हुए कहा कि दो दिनों में 60 से अधिक पैनलिस्टों और 50 उद्योगपतियों ने डिजिटल व राष्ट्रीय संप्रभुता पर मंथन किया है। उन्होंने बताया कि संस्थान में सिद्धांतों को कौशल में बदला जाता है जहाँ ‘विद लैब्स’ के जरिए न्याय की नींव को मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी के मार्गदर्शन में क्वांटम प्रगति को साइबर सुरक्षा का 5वां स्तंभ बनाया जा रहा है और कंसेंट मैनेजमेंट फ्रेमवर्क के जरिए डीपीजीपी एक्ट का प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है।
इस अवसर पर मा मुख्यमंत्री द्वारा आधुनिक टेक्नोलॉजी के दृष्टिगत डॉ. सुभाष रस्तोगी, डॉ. जीके गोस्वामी, डॉ. मनोरंजन मिश्र एवं उपेन्द्र गिरी द्वारा लिखित पुस्तक ‘ऐआई इन कंस्ट्रक्शन’ का विमोचन तथा यूपीएसआईएफएस और Zscaler के बीच विशेष सहयोग से ‘अभेद’ एवं LEXQ क्वांटम लैब का शुभारम्भ किया गया। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 का प्रभावी क्रियान्वयन लागू किया गया तथा 10 राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर डिजिटल संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा, क्वांटम और डीप-टेक इनोवेशन, विकसित भारत 2047, साइबर लचीलापन, डेटा सुरक्षा, डीपफेक और जिम्मेदार सार्वजनिक संचार, विश्वविद्यालय-उद्योग सहयोग, कौशल विकास, राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, एआई और क्वांटम की रणनीतिक प्रतिस्पर्धा, तथा कानूनी अनुपालन (स्महंस ब्वउचसपंदबम) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा हुई।
इन सत्रों में प्रो. अभय करंदीकर, आलोक कुमार (आईएएस), नवीन कुमार सिंह (आईपीएस), बृजेश सिंह (आईपीएस), प्रो. जे. पी. पांडेय, डॉ. जे. बी. वी. रेड्डी, डॉ. राजकुमार उपाध्याय, प्रो. ए. नागरत्ना, वैभव प्रताप सिंह, आदित्य एस. जी. व्यास, हरमान सिंह कोहली, डॉ. अमित शर्मा, डॉ. निखिल जोशी, अरिंदम रॉय, अनुज गुप्ता, विनु कुमार ए. आर., प्रो. अजय सिंह, तेज चिंतालापति, प्रो. एम. पी. गुप्ता, विशाल गौतम, डॉ. कुंज टंडन, रुनाल दहिवाडे, रवींद्र बारलिंगाय, सी. वेंकट श्रीधर, डॉ. नगेंद्र नागराज, आधेश त्यागी, पांडुरंगा आचार्य, अनुपम सरन और धनश्री कलामकर जैसे विशेषज्ञों ने भाग लिया और अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर अपर निदेशक संजीव सुमन ने सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया।
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