प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए अमेठी में दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ
अमेठी, संवाददाता। केंद्र सरकार के सेवा, सुशासन एवं जनकल्याण के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में जनपद अमेठी में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला पंचायत रिसोर्स सेंटर, गौरीगंज में दो दिवसीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला, जनपद स्तरीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी एवं आत्मा योजनांतर्गत किसान मेले का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में जिले के प्रगतिशील किसानों ने बड़ी संख्या में प्रतिभाग कर प्राकृतिक खेती की तकनीकों एवं कृषि संबंधी नवीन जानकारियां प्राप्त कीं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी संजय चौहान ने कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि वर्तमान कृषि पद्धति में उत्पादन तो बढ़ रहा है, लेकिन रासायनिक खेती के बढ़ते प्रभाव से मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादित खाद्यान्न स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ-साथ भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप आयोजित इस कार्यशाला का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
कार्यशाला में कृषि विज्ञान केंद्र कठौरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. लाल पंकज सिंह ने प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत एवं नीमास्त्र तैयार करने की विधि तथा उनके उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने खरीफ फसलों एवं धान की नर्सरी प्रबंधन संबंधी महत्वपूर्ण तकनीकी सुझाव भी किसानों को दिए।
वहीं डॉ. रेनू सिंह ने श्रीअन्न (मिलेट्स) के महत्व, उपयोगिता एवं पोषण संबंधी लाभों पर विस्तृत चर्चा की। उप कृषि निदेशक सत्येंद्र कुमार ने कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, किसानों को मिलने वाले लाभों एवं खरीफ अभियान की तैयारियों के संबंध में जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल एवं प्रदर्शनी लगाकर किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, सरकारी योजनाओं तथा नवीन कृषि उपकरणों की जानकारी दी गई।
इस अवसर पर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा केंद्र एवं प्रदेश सरकार की विगत 12 वर्षों की उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं एवं विकास कार्यों पर आधारित आकर्षक विकास प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में युवा, महिला, किसान, गरीब एवं वंचित वर्गों के कल्याण के लिए संचालित योजनाओं के साथ-साथ एक्सप्रेस-वे, औद्योगिक गलियारा, डिजिटल गवर्नेंस, हरित ऊर्जा एवं ग्रामीण विकास से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदर्शित की गईं। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ धाम तथा प्रयागराज महाकुंभ सहित प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के विकास कार्य भी प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण रहे।
कार्यक्रम स्थल पर प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के कटआउट के साथ स्थापित सेल्फी प्वाइंट आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। यह प्रदर्शनी 20 जून तक जनसामान्य के अवलोकन हेतु खुली रहेगी। कार्यक्रम के दौरान संस्कृति विभाग के पंजीकृत कलाकारों द्वारा लोक गायन एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से किसानों को कृषि एवं प्राकृतिक खेती के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी पूजा साहू, जिला विकास अधिकारी वीरभानु सिंह, उप कृषि निदेशक सत्येंद्र कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र के पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
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