मुख्य विकास अधिकारी ने माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के साथ की विभागीय योजनाओं एवं शैक्षणिक गतिविधियों की समीक्षा
अमेठी (संवाददाता)। मुख्य विकास अधिकारी पूजा साहू द्वारा गुरूवार को जनपद के समस्त राजकीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के साथ बैठक कर विभागीय योजनाओं एवं शैक्षणिक गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक, अमेठी सहित जनपद के 37 राजकीय एवं 25 अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
बैठक में विद्यालयों के आधारभूत आंकड़ों के साथ विगत 3 वर्षों के परीक्षा परिणाम, कमजोर विषयों एवं विद्यार्थियों की पहचान, उपचारात्मक शिक्षण की व्यवस्था, आगामी बोर्ड परीक्षा की तैयारी, पाठ्यक्रम की पूर्णता, विद्यार्थियों की उपस्थिति एवं ड्रॉपआउट की स्थिति, विद्यार्थियों की औसत उपस्थिति, अनुपस्थित रहने के कारण एवं उनके निदान, ड्रॉपआउट विद्यार्थियों के पुनः नामांकन के प्रयास, शिक्षक उपलब्धता एवं उत्तरदायित्व तथा शिक्षक उपस्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई।
इसके साथ ही विद्यार्थियों के सीखने के स्तर का नियमित आकलन, लर्निंग गैप की पहचान एवं उसके निराकरण, विद्यालयों में सुरक्षा एवं शिकायत निवारण प्रणाली, परामर्श एवं मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं, आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता एवं उनमें विद्यमान कमियां, खेलकूद सुविधाएं, नशीले पदार्थों से बचाव हेतु जागरूकता के प्रयास, छात्रवृत्ति संबंधी कार्य, विद्यार्थियों के अभिलेख एवं पोर्टल संबंधी कार्यों की भी समीक्षा की गई। प्रत्येक विद्यालय की ऐसी 3 प्रमुख समस्याओं, जिनमें जिला स्तर से हस्तक्षेप की आवश्यकता है, के संबंध में प्रधानाचार्यों से जानकारी प्राप्त कर विस्तृत चर्चा की गई।
मुख्य विकास अधिकारी पूजा साहू द्वारा आगामी बोर्ड परीक्षा को दृष्टिगत रखते हुए सभी प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया गया कि विद्यालयवार कार्ययोजना तैयार कर निर्धारित समयावधि में पाठ्यक्रम की शत-प्रतिशत पूर्णता सुनिश्चित की जाए। विद्यार्थियों के विषयवार प्रदर्शन का नियमित आकलन करते हुए जिन विषयों अथवा विद्यार्थियों में अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है, उन्हें चिन्हित कर विशेष मार्गदर्शन एवं उपचारात्मक शिक्षण प्रदान किया जाए, ताकि प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी क्षमता के अनुरूप बेहतर प्रदर्शन का अवसर मिल सके।
उन्होंने विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने, अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों के कारणों की पहचान कर उनका प्रभावी निदान करने तथा ड्रॉपआउट विद्यार्थियों को पुनः विद्यालय से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास करने के निर्देश दिए।
बैठक में प्रधानाचार्यों द्वारा विद्यालय स्तर पर आ रही विभिन्न समस्याओं एवं जिला स्तर से अपेक्षित सहयोग के संबंध में अवगत कराया गया। मुख्य विकास अधिकारी द्वारा समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक, अमेठी को संबंधित विभागों से आवश्यक अंतर्विभागीय समन्वय स्थापित कर समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए।
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि शासन एवं जिला प्रशासन की मंशा है कि शिक्षा का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग एवं सबसे निचले पायदान तक पहुंचने वाले प्रत्येक परिवार के बच्चे को समान रूप से प्राप्त हो। किसी भी विद्यार्थी की परिस्थितियां उसकी शिक्षा में बाधक न बनें तथा प्रत्येक बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करते हुए अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़े, इसके लिए विद्यालय स्तर से लेकर जिला स्तर तक समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा कि केवल विद्यालय में नामांकन करा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी का नियमित विद्यालय आना, कक्षा में सक्रिय रूप से सीखना, उसके अधिगम स्तर का निरंतर आकलन होना तथा जहां कहीं भी सीखने में कमी दिखाई दे, वहां समय रहते उपचारात्मक शिक्षण के माध्यम से उस कमी को दूर करना आवश्यक है। “कोई भी बच्चा पीछे न छूटे और प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले” के उद्देश्य के साथ सभी प्रधानाचार्य एवं शिक्षक पूरी जिम्मेदारी से कार्य करें।
मुख्य विकास अधिकारी द्वारा सभी प्रधानाचार्यों के माध्यम से विद्यार्थियों के अभिभावकों से भी विशेष अपील की गई कि बच्चों की शिक्षा को बेहतर बनाने में जितनी महत्वपूर्ण भूमिका शिक्षकों, विद्यालय एवं पुस्तकों से प्राप्त ज्ञान की है, उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका अभिभावकों की भी है। बच्चे की नियमित उपस्थिति, घर पर अध्ययन के लिए अनुकूल वातावरण, अनुशासन, समय का सदुपयोग तथा उसकी शैक्षणिक प्रगति पर निगरानी में अभिभावकों की सक्रिय सहभागिता अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया कि अभिभावकों के साथ नियमित संवाद एवं बैठकें आयोजित कर उन्हें बच्चों की शैक्षणिक प्रगति, उपस्थिति, अनुशासन एवं आगामी परीक्षाओं की तैयारियों के संबंध में अवगत कराया जाए तथा अभिभावकों को विद्यालय एवं शिक्षकों के साथ मिलकर बच्चों के बेहतर भविष्य के निर्माण में सहभागी बनाया जाए।
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थीकृइन तीनों के समन्वित प्रयास से ही शिक्षा की गुणवत्ता में स्थायी सुधार संभव है। जिला प्रशासन का उद्देश्य जनपद में ऐसा शैक्षिक वातावरण तैयार करना है, जहां प्रत्येक विद्यार्थी को सीखने, आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा को विकसित करने का समान अवसर मिले तथा अमेठी के विद्यार्थी शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर बेहतर परिणाम प्राप्त करें।
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