छुट्टा पशुओं के संरक्षण के लिए तीन दिवसीय विशेष अभियान चलाने के जिलाधिकारी ने दिए निर्देश

Oct 5, 2026 - 20:34
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छुट्टा पशुओं के संरक्षण के लिए तीन दिवसीय विशेष अभियान चलाने के जिलाधिकारी ने दिए निर्देश

हमीरपुर (संवाददाता)। कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी अशोक कुमार की अध्यक्षता में गौशालाओं के संचालन, छुट्टा पशुओं के संरक्षण एवं पशुओं के स्वास्थ्य की स्थिति की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में जिलाधिकारी ने छुट्टा पशुओं के संरक्षण के लिए तीन दिवसीय विशेष अभियान चलाकर शेष पशुओं को गौशालाओं में संरक्षित करने के कड़े निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने अप्रैल माह में छोड़े गए पशुओं तथा वर्तमान में गौशालाओं में संरक्षित पशुओं की संख्या में लगभग 5,000 पशुओं के अंतर को चिन्हित करते हुए निर्देश दिए कि अप्रैल माह एवं वर्तमान के आंकड़ों का ब्लॉकवार बाइफरकेशन तैयार कर विशेष अभियान चलाया जाए और तीन दिनों के भीतर सभी छुट्टा पशुओं को गौशालाओं में संरक्षित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि अभियान के बाद सड़कों अथवा खेतों में एक भी छुट्टा पशु घूमता हुआ नहीं मिलना चाहिए। अभियान पूर्ण होने के चौथे दिन संबंधित अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में कोई छुट्टा पशु बाहर न होने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेंगे।

उन्होंने प्रत्येक विकासखंड में खंड विकास अधिकारी एवं पशुपालन विभाग के अधिकारी/पशु चिकित्साधिकारी की संयुक्त टीम गठित कर अभियान की प्रभावी निगरानी के निर्देश दिए। तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी नोडल अधिकारी के रूप में प्रतिदिन अनुश्रवण करेंगे। मुख्य पशुचिकित्साधिकारी को प्रतिदिन सायं 7 बजे जिलाधिकारी के समक्ष अभियान की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभियान के बाद यदि किसी ब्लॉक में सड़क या खेत में छुट्टा पशु पाया जाता है तो संबंधित खंड विकास अधिकारी एवं पशुपालन अधिकारी की जवाबदेही तय करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी।

जिलाधिकारी ने पशुपालकों द्वारा दूध निकालने के बाद पशुओं को खुले में छोड़ने की प्रवृत्ति पर प्रभावी रोक लगाने के लिए नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा ग्राम पंचायतों को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित करने को कहा।

बैठक में पशुओं को लंपी सहित वर्षाजनित अन्य रोगों से बचाव, टीकाकरण तथा उपचार की स्थिति की भी समीक्षा की गई। ब्लॉकवार टीकाकरण की प्रगति प्रतिदिन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। गौशालाओं में बीमार पशुओं, छोटे बच्चों, दुधारू पशुओं तथा आक्रामक सांडों को अलग-अलग बाड़ों में रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। किसी पशु की मृत्यु होने पर उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कराने के भी निर्देश दिए गए।

गौशालाओं में साफ-सफाई एवं मूलभूत सुविधाओं पर विशेष जोर देते हुए जिलाधिकारी ने चरहियों की नियमित सफाई, काई हटाने तथा चूने का छिड़काव कराने के निर्देश दिए। जलभराव वाले स्थानों पर मिट्टी भराव एवं खड़ंजा कराने को कहा। पशुओं को निर्धारित मानक के अनुसार प्रति पशु 5 किलोग्राम हरा चारा एवं 500 ग्राम पशु आहार/दाना नियमित रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही ‘सुपोषित बचपन/सहभागिता योजना’ के अंतर्गत रू0 1,500 प्रतिमाह प्रति पशु की दर से दिए जाने वाले पशुओं के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक लोगों को सहभागिता के लिए प्रेरित करने को कहा।

तकनीकी निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए गौशालाओं में स्थापित सीसीटीवी कैमरों का ऑनलाइन एक्सेस खंड विकास अधिकारी, एडीओ पंचायत, ग्राम पंचायत सचिव तथा पशु चिकित्सकों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, ताकि गौशालाओं की लाइव मॉनिटरिंग की जा सके। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया अथवा मीडिया में गौशालाओं से संबंधित कोई भ्रामक अथवा नकारात्मक खबर सामने आने पर संबंधित बीडीओ एवं पशुपालन अधिकारी तत्काल तथ्यों पर आधारित स्पष्टीकरण तथा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को उपलब्ध कराएं।

जिलाधिकारी ने कहा कि गौशालाओं में संरक्षित पशुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य, चारा-पानी एवं स्वच्छता में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी संबंधित अधिकारी अभियान को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित समयसीमा में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) राकेश कुमार, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) रिजवाना शाहिद, जिला विकास अधिकारी राघवेंद्र सिंह, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. भूपेंद्र सिंह यादव, जिला सूचना अधिकारी सतीश कुमार सहित अन्य अधिकारी एवं संबंधित खंड विकास अधिकारी, अधिशासी अधिकारी तथा पशुचिकित्साधिकारी आदि उपस्थित रहे।

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